Hythro Power Corporation Ltd bank fraud case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 350 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में हाइथ्रो पावर कंपनी लिमिटेड (HPCL) और उसके डायरेक्टर्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी गुरुग्राम जोन की टीमों ने बुधवार को दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई और बेंगलुरु में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
यह मामला CBI की उस FIR से जुड़ा है जो 4 फरवरी 2025 को दर्ज की गई थी। FIR में HPCL और उसके डायरेक्टर्स अमुल गबरानी और अजय कुमार बिश्नोई पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों से लिए गए लोन को अपनी अन्य कंपनियों और ग्रुप एंटिटीज में ट्रांसफर करके पैसों की हेराफेरी की।
लगभग 350 करोड़ का फ्रॉड
इस फ्रॉड की कुल रकम लगभग 346.08 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसमें पंजाब नेशनल बैंक को 168.07 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक को 77.81 करोड़, कोटक महिंद्रा बैंक को 44.49 करोड़ और यूनियन बैंक को 55.71 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
HPCL पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में काम करती थी और 2009 से 2015 के बीच इसने बैंकों से भारी लोन लिया। लगातार डिफॉल्ट करने के बाद 31 मार्च 2015 को इसे NPA घोषित कर दिया गया और 2024 में बैंकों ने इस केस को फ्रॉड मानते हुए RBI को रिपोर्ट की।
इन कंपनियों में पैसा लगाने का आरोप
फॉरेंसिक ऑडिट में यह खुलासा हुआ कि कंपनी ने पैसों को अपनी ग्रुप कंपनियों जैसे अवध ट्रांसफॉर्मर्स प्रा. लि., जी.ई.टी. पावर प्रा. लि., रिवोल्यूशन इंफोकॉम प्रा. लि. और टेकप्रो इंजीनियरिंग प्रा. लि. के जरिए फर्जी लेन-देन कर Siphon (किसी कंपनी से कुछ समय तक अवैध रूप से धन लेना) कर लिया। कई एडवांस पेमेंट और इनवॉइस सालों तक वसूल नहीं किए गए और पैसों को गैरकानूनी तरीके से घुमाया गया।
इस फ्रॉड से बैंकों को भारी नुकसान हुआ है और उनकी वसूली लगभग नामुमकिन हो गई है। मामला न केवल बैंकों की वित्तीय हालत पर असर डालता है बल्कि कॉरपोरेट सेक्टर को दिए जाने वाले लोन पर भरोसे को भी कमजोर करता है। ईडी की जांच फिलहाल जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।
