Rahul Gandhi Raebareli Protest: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को रायबरेली में विरोध का सामना करना पड़ा है। इस बीच उन्होंने टाइम्स नाउ के सवाल का जवाब देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़े पैमाने पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया। उन्होंने 'वोट चोर, गद्दी छोड़' कहकर राजनीतिक तूफान को फिर से हवा दे दी।
नेपाल संकट के सवालों को टालते हुए उन्होंने अपने इस पुराने नारे को ही हवा दी। भाजपा कार्यकर्ताओं ने यूपी के रायबरेली में उनके काफिले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए नारे लगाए।
उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट चोरी
उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट चोरी के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर राहुल गांधी ने कहा, 'वोट चोर गद्दी छोड़। यह पूरे देश में हो रहा है और उत्तर प्रदेश में भी, यह पूरे देश में हो रहा है।'
BJP का पलटवार
गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, 'वोट चोरी का तो पता नहीं, लेकिन राहुल जी को बताना चाहिए कि क्या कांग्रेस नेताओं का दिमाग चुरा लिया गया है? अब राहुल जी कह रहे हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव में अंतरात्मा की आवाज पर वोट देना भी वोट चोरी है। आपका दुष्प्रचार कहां रुकेगा?'
'वोट चोरी' विवाद
'वोट चोरी' विवाद 7 अगस्त को शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने 2024 के संसदीय चुनावों में बड़े पैमाने पर मतदाता हेरफेर का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ की गई है और अपने आरोप के समर्थन में उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र-स्तरीय आंकड़े भी दिए। उनके अनुसार, बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा में 1,00,000 से अधिक संदिग्ध एंट्री थीं, जिनमें डुप्लिकेट मतदाता, अमान्य पते और एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में पंजीकरण शामिल थे।
उन्होंने दावा किया कि महादेवपुरा क्षेत्र में 1,00,250 वोटों की 'वोट चोरी' हुई, जिसमें 11,965 डुप्लीकेट मतदाता, 40,009 मतदाता फर्जी और अमान्य पते वाले, 10,452 बल्क मतदाता या एकल पते वाले मतदाता, 4,132 मतदाता अमान्य फोटो वाले और 33,692 मतदाता नए मतदाताओं के फॉर्म 6 का दुरुपयोग कर रहे थे, जिनमें 90 वर्ष से अधिक आयु के लोग भी शामिल थे।
चुनाव आयोग ने नकारा
उन्होंने ऐसे उदाहरण भी दिए जैसे एक मतदाता ने दो बार मतदान किया। हालांकि, ये ऐसे दावे रहे जिन्हें चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है। गांधी ने आगे आरोप लगाया कि मतदान केंद्रों से सीसीटीवी फुटेज खत्म कर दिए गए थे और ऐसे मामलों का हवाला दिया जहां एक ही पते पर दर्जनों मतदाता पंजीकृत थे। बिहार में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच यह विवाद और बढ़ गया।
