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चिराग पासवान और नीतीश कुमार के बीच मुलाकात हुई, क्या बात हुई? समझिए इसके सियासी मायने

Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से चिराग पासवान ने शिष्टाचार मुलाकात की। पासवान ने कहा कि राजग 2019 से बेहतर प्रदर्शन करेगा जब उसने बिहार में एक सीट को छोड़कर सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद, वे ईवीएम के बारे में टिप्पणी करते नजर आएंगे।

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नीतीश कुमार से मिले चिराग पासवान।

Photo : Twitter

Chirag Paswan Met Nitish Kumar: कल तक सियासत में नीतीश कुमार को अपना सबसे बड़ा विरोधी मानने वाले चिराग पासवान के तेवर बदल चुके हैं। लोकसभा चुनाव से पहले जहां दोनों नेता एक ही गठबंधन के हिस्सा हो गए तो वहीं दोनों के बीच अब करीबियां बढ़ती भी नजर आ रही हैं। दरअसल, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 'शिष्टाचार मुलाकात' की। आपको इसके सियासी मायने समझने चाहिए।

बिहार की सियासत में इस मुलाकात के मायने

जबसे चिराग पासवान की पार्टी टूटी, वो बिहार के सीएम पर लगातार तीखा प्रहार करते हैं। अब तक नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच सबकुछ ठीक नहीं था, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 में एक ही गठबंधन में शामिल होने के बाद से चिराग भी नीतीश के खिलाफ कुछ बोलने से बचते रहे हैं। अब ये समझना होगा कि चिराग आखिर नीतीश के करीबी क्यों बढ़ा रहे हैं। वो इस बात को समझते हैं कि आगामी वर्ष 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में वो जरा भी कोताही नहीं बरतना चाहते हैं और इस कोशिश में होंगे की NDA में रहते हुए उनकी पार्टी को द्यादा से ज्यादा सीटें मिले। शायद यही वजह है कि चिराग पुराने गिले-शिकवे को भुलाकर नए रिश्ते बनाने की कोशिश में हैं।

नीतीश कुमार को लेकर कैसे बदले चिराग के सुर?

लोकसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान का नीतीश कुमार को लेकर काफी तल्ख रुख था। हालांकि अब उनके सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। पासवान ने नीतीश से मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा, 'बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शिष्टाचार भेंट कर उनका कुशल क्षेम जाना।' नीतीश से मुलाकात के बाद पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत के दौरान पासवान ने कहा, 'लोकसभा चुनाव के अभी दो और चरण बाकी हैं, ऐसे में शांत माहौल में यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी। मैंने कई सीटों पर जद(यू) उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया है। मैंने वहां की स्थिति के बारे में अपनी जानकारी साझा की और उन्होंने भी क्षेत्र के बारे में जानकारी ली।'

बिहार में NDA में शामिल दलों का गणित समझिए

बिहार की 40 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे अधिक 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। जद(यू) ने 16 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जबकि पांच सीटें पासवान की पार्टी को मिली हैं। इसके अलावा एक-एक सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) चुनाव लड रहे हैं।

चिराग ने सभी 40 सीटों पर जीत का किया दावा

चिराग पासवान ने कहा कि राजग 2019 से बेहतर प्रदर्शन करेगा जब उसने बिहार में एक सीट को छोड़कर सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'चुनाव खत्म होने के बाद, वे ईवीएम के बारे में टिप्पणी करते नजर आएंगे।' राजद नेता तेजस्वी यादव के चुनावी रैलियों में बॉलीवुड गानों की नकल उतारने के बारे में पूछे जाने पर पासवान ने कहा, 'वह मेरे छोटे भाई की तरह हैं। मैं उन्हें याद दिलाना चाहूंगा कि चुनाव ऐसे हथकंडों के जरिए नहीं बल्कि लोगों का विश्वास जीतकर जीता जा सकता है।'

राहुल गांधी पर चिराग पासवान ने साधा निशाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस आरोप को लेकर चिराग पासवान ने उनपर निशाना साधा कि राजग शासन काल के दौरान 'केवल 22 लोग' अमीर हुए। पासवान ने कहा, 'अगर प्रधानमंत्री ने केवल मुट्ठी भर लोगों की परवाह की होती तो 25 करोड़ लोग गरीबी के चंगुल से बाहर नहीं निकलते। वह बहुत हताश हैं क्योंकि तुष्टीकरण की उनकी राजनीति को लोगों ने खारिज कर दिया है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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