CEC Calls Meeting: चुनाव आयो गने मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। इस सिलिसिले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अहम बैठक बुलाई है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची के आंकड़ों में हेराफेरी के आरोपों के बीच मतदाता पहचान पत्रों को आधार से जोड़ने के मुद्दे पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह सचिव और विधायी सचिव के साथ बैठक बुलाई है।
टीएमसी ने लगाया था आरोप
विभिन्न राज्यों में मतदाताओं को आवंटित किए गए डुप्लीकेट मतदाता फोटो पहचान पत्र क्रमांक के मामलों को उठाते हुए, विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन अधिकारी भारतीय जनता पार्टी की मदद करने के लिए मतदाता सूची में हेराफेरी कर रहे हैं।
राहुल ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी लोकसभा में इसी तरह की भावनाएं व्यक्त की थीं। निर्वाचन आयोग ने अगले तीन महीनों में इस मामले को निपटाने का आश्वासन दिया है। आयोग ने कहा है कि डुप्लीकेट नंबर का मतलब जरूरी नहीं कि फर्जी मतदाता ही हों। सूत्रों ने बताया कि कुमार मंगलवार को गृह सचिव, विधायी सचिव और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सीईओ के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
सरकार ने संसद को बताया कि आधार-मतदाता पहचान पत्र को जोड़ने का काम एक प्रक्रिया संचालित काम है। सरकार ने यह भी कहा है कि जो लोग अपने आधार विवरण को मतदाता सूची से नहीं जोड़ेंगे, उनके नाम मतदाता सूची से नहीं काटे जाएंगे।
सरकार ने संसद में क्या कहा
सरकार ने संसद को बताया है कि आधार-वोटर कार्ड जोड़ने की अभ्यास प्रक्रिया जारी है और प्रस्तावित लिंकिंग के लिए कोई लक्ष्य या समयसीमा नहीं दी गई है। सरकार ने यह भी कहा है कि जो लोग अपने आधार विवरण को मतदाता सूची से नहीं जोड़ते हैं, उनके नाम मतदाता सूची से नहीं काटे जाएंगे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23, जिसे चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित किया गया है, उसमें प्रावधान है कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी मौजूदा या भावी मतदाता से स्वैच्छिक आधार पर पहचान स्थापित करने के लिए आधार संख्या प्रदान करने की मांग कर सकते हैं।
