Parliament Winter Session: कृषि कानून हुए निरस्त, ओवैसी की मांग- CAA भी वापस लिया जाए
Parliament Winter Session 2021: संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत सोमवार से हो गई है। विपक्ष के हंगामे के बीच कृषि कानूनों को वापस लेने वाला बिल लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो गया है। यह सत्र 23 दिसंबर तक चलने वाला है। इस शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार 26 विधेयकों को पेश करने वाली है। सरकार की तरफ से जो अहम विधेयक पेश होने वाले हैं उनमें कृषि कानून निरस्त विधेयक, क्रिप्टोकरेंसी एवं रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल प्रमुख है।
लोकसभा और राज्यसभा से कृषि कानून वापसी बिल पास पास हो गया है। बिल हंगामे के बीच दोनों सदनों में पेश किया गया था। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर का इंतजार है। विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि कृषि कानून रद्द करना ये बताता है कि पीएम ने अपनी गलती मानी है और इसी गलती की वजह से आंदोलन शुरू हुआ था। लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी कृषि कानून वापसी बिल ध्वनि मत से पास हो गया। अब ये बिल राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। इस बिल पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सदन में चर्चा की मांग की थी। लेकिन बिल को बिना चर्चा के मंजूरी दे दी गई। जिस पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। चौधरी ने कहा, कि बिना चर्चा के कृषि कानून वापसी बिल पास कराना ठीक नहीं है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वो विपक्ष को बोलने का मौका नहीं देती।
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विशेष संसद संरक्षण विधेयक पारित हो: जया बच्चन
सपा सांसद जया बच्चन ने कहा कि इतने सालों से मैं यहां हूं, मैं पहली बार इस तरह का माहौल देख रही हूं। बिल पूरी तरह से हंगामे के बीच पास हो गया। मुझे लगता है कि अब एक विशेष संसद संरक्षण विधेयक पारित किया जाना चाहिए। छोटी पार्टियों को बोलने का मौका नहीं मिलता। उन्हें लोगों के नुकसान, हड़तालों और सब्जियों की बढ़ती कीमतों के बारे में बात करनी चाहिए थी। यह सरकार क्या कर रही है? हम कैसे खाएंगे? पानी प्रदूषित है, हवा प्रदूषित है, हम कैसे रहेंगे?।
चुनाव के कारण कृषि कानून वापस हुए: ओवैसी
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक नुकसान के डर से सरकार ने कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया है। देश में एक बड़ा समूह कह रहा है कि सीएए संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हम मांग करते हैं कि केंद्र नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को निरस्त करे।
राहुल गांधी का हमला, 'गलती मानी तो किसानों को मुआवजा भी दे सरकार'
राज्यसभा से भी पारित हुआ बिल
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि कानूनों को वापस लेने वाले विधेयक को राज्यसभा में पेश कर दिया है। इस विधेयक पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बात रख रहे हैं। लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार 11 बजे तक स्थगित हो गई है। इस बीच, राज्यसभा से भी यह विधेयक पारित हो गया है।
Amid ruckus in Upper House, the Farm Laws Repeal Bill 2021 passed in Rajya Sabha pic.twitter.com/m4JqZPeOCi
— ANI (@ANI) November 29, 2021
शहीदों को श्रद्धांजलि है-टिकैत
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि लोकसभा में कृषि कानून निरस्त विधेयक का पारित होना, आंदोनल में जान गंवाने वाले 750 किसानों को श्रद्धांजलि है। एमएसपी का मुद्दा जब तक लटका रहेगा तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा।
दोनों सदनों की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित
कृषि कानून वापसी बिल को लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में पेश किया गया। लेकिन हंगामे की वजह से दोनों सदनों की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार मनमानी कर रही है। इसके साथ ही कांग्रेस ने गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी की मांग की।
कृषि कानूनों को वापस लेने वाला बिल राज्यसभा में पेश
कृषि कानूनों को वापस लेने वाला विधेयक लोकसभा में ध्वनि मत से पारित करने के बाद सरकार ने इस विधेयक को अब राज्यसभा में पेश कर दिया है। सरकार चाहती है कि यह विधेयक आज ही दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो जाए। वहीं, विपक्ष किसानों के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग कर रहा है।
कांग्रेस समेत 11 विपक्षी दलों ने रणनीति तय की
कांग्रेस समेत 11 विपक्षी दलों के नेताओं ने सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के आरंभ होने से पहले बैठक की जिसमें तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने संबंधी विधेयक सहित कई मुद्दों को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में हुई इस बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया। इस बैठक में खड़गे के अलावा राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा, मुख्य सचेतक जयराम रमेश, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी एवं मुख्य सचेतक के. सुरेश शामिल हुए।
लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हुआ कृषि कानूनों को वापस लेने वाला बिल
लोकसभा में हंगामे के बीच कृषि कानून वापसी पर बिल पेश
विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच कृषि कानून वापसी बिल लोकसभा में पेश कर दिया गया है। लोकसभा की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हंगामा कर रहे विपक्षों से कहा कि वह किसानों के मुद्दे पर पूर्ण रूप से चर्चा कराएंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि कानूनों को वापस लेने वाला विधेयक पेश किया।
सोनिया के नेतृत्व में संसद परिसर में प्रदर्शन
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों ने सोमवार को किसानों के मुद्दों को लेकर संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। संसद भवन परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन से पहले, कांग्रेस सांसदों की सोनिया गांधी की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने संबंधी विधेयक और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगाए। इस मौके पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे। कांग्रेस सांसदों ने तीनों कानूनों को तत्काल निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने की मांग की। उधर, राहुल गांधी ने तीनों कृषि काननों को निरस्त करने संबंधी विधेयक को संसद में पेश किए जाने से पहले कहा कि आज संसद में अन्नदाता के नाम का सूरज उगाना है। राहुल ने ट्वीट किया, ‘आज संसद में अन्नदाता के नाम का सूरज उगाना है।’
राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित
संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्यसभा की बैठक पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा सदस्य ऑस्कर फर्नाडीज तथा अपने छह पूर्व दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद 11 बज कर 20 मिनट पर एक घंटे के लिए स्थगित कर दी गयी।
लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी करनी शुरू कर दी। सदस्यों के हंगामे को देखते हुए लोकसभा की की कार्यवाही दिन के 12 बजे तक स्थगित कर दी गई है।
दोनों सदनों में कार्यवाही शुरू
संसद के दोनों सदनों लोकसभा एवं राज्यसभा में शीतकालीन सत्र की कार्यवाही शुरू हो गई है।
कृषि कानूनों पर चर्चा नहीं कराएगी सरकार
कृषि कानूनों पर किसी तरह की चर्चा नहीं कराएगी सरकार। सरकार को लगता है कि एमएसपी पर विपक्ष सरकार को घेरना चाहता है और उसकी कोशिश जो संदेश देने की है वह कमजोर पड़ेगी। कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए कोई समय तय नहीं किया गया है। शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले पीएम मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की।
संसद भवन में प्रदर्शन में शामिल हुईं सोनिया गांधी
शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस की अंतिम अध्यक्ष सोनिया गांधी कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुईं। कांग्रेस सदस्यों ने कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की है।
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'आज संसद में अन्नदाता के नाम का सूरज उगाना है'
शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया है। राहुल ने कहा है कि - 'आज संसद में अन्नदाता के नाम का सूरज उगाना है'।
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11 बजे से होगी शीतकालीन सत्र की शुरुआत
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत दिन के 11 बजे से होगी। शीतकालीन सत्र में विपक्ष सरकार को घेरने के लिए 10 बजे बैठक कर रहा है। विपक्ष किसानों के मुद्दों पर चर्चा कराए जाने की मांग रखेगा। सत्र से पहले सुबह 10.30 लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक होगी।
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किसानों के खिलाफ मामले वापस लेने पर केंद्र के निर्देशानुसार काम करेंगे- खट्टर
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि कृषि कानूनों का समाधान होने के बाद केंद्र के निर्देशों के मुताबिक उनकी सरकार किसानों के खिलाफ पुलिस मामलों को वापस लेने पर निर्णय करेगी। खट्टर ने एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा था कि केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में हैं और उन्हें इस पर निर्णय करना होगा। खट्टर ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ‘जब इस मुद्दे का समाधान होगा तो उस वक्त केंद्र जो कहेगा, उसके अनुसार हम निर्णय लेंगे।’
टिकैत ने किसानों के लिए MSP की गारंटी के लिए कानून की मांग की
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को मांग की कि केंद्र देश में किसानों के हितों की रक्षा के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए एक कानून लाये। मुंबई में संयुक्त शेतकरी कामगार मोर्चा (एसएसकेएम) के बैनर तले आजाद मैदान में आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में हिस्सा लेने आये टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एमएसपी के समर्थक थे, जब वह गुजरात मुख्यमंत्री थे और वह किसानों के हितों की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कानून चाहते थे। उन्होंने मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर बहस से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘केंद्र को किसानों को एमएसपी की गारंटी देने के लिए एक कानून लाना चाहिए। कृषि और श्रम क्षेत्रों से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है और हम उन्हें उजागर करने के लिए पूरे देश में यात्रा करेंगे।’

