Farmers protest: किसानों के प्रदर्शन को लेकर BJP चीफ नड्डा के आवास पर बैठक, शाह-राजनाथ भी रहे मौजूद
नए कृषि कानूनों को लेकर किसान लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान राष्ट्रीय राजधानी के सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर अब भी जमे हुए हैं। हालांकि सरकार ने उनसे कहा है कि वे बुराड़ी के मैदान में शिफ्ट हो जाएं, इसके बाद उनसे बात की जाएगी। किसानों ने बुराड़ी जाने से मना कर दिया है।
नई दिल्ली: किसानों का आंदोलन रविवार को चौथे दिन भी जारी है। केंद्र सरकार द्वारा लागू नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे किसान देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। हालांकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अपील के बाद किसान नेताओं का मंथन किया और बुराड़ी जाने से मना कर दिया। एक तरफ किसान गाजियाबाद- दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं तो दूसरी तरफ हरियाणा से सटे दिल्ली के सिंघू बार्डर पर भी किसान डेरा जमाए हुए है। यहां जानिए किसान आंदोलन से जुड़ी हर ताजा अपडेट:
किसानों के प्रदर्शन को लेकर बैठक
दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पर किसानों के प्रदर्शन को लेकर बैठक। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर शामिल हुए।
ट्रेनों की आवाजाही हुई प्रभावित
पश्चिम रेलवे के मुख्य पीआरओ ने बताया, 'पंजाब में किसान आंदोलन के कारण ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई है और इसलिए कुछ ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया गया है और कुछ रेलगाड़ियों को अल्पावधि में समाप्त किया गया है।'
किसानों ने की बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश
सुरक्षा तैनाती के बीच गाजीपुर-गाजियाबाद (दिल्ली-यूपी) बॉर्डर पर किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। गाजीपुर में किसानों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की।
#WATCH Delhi: Farmers continue their protest at Ghazipur-Ghaziabad (Delhi-UP) border against the farm laws amid security deployment.
— ANI (@ANI) November 29, 2020
Visuals of farmers trying to break through the barricades at Ghazipur, Delhi pic.twitter.com/dMunJhmDdg
किसानों से सरकार की अपील
बातचीत के लिए तैयार किसान: कृषि मंत्री
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा, 'सरकार ने चौथी बार 3 दिसंबर को मिलने का प्रस्ताव दिया है। इसलिए, पहले से ही बातचीत चल रही है, किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। सरकार बातचीत के लिए तैयार है, किसानों की यूनियनों को इसके लिए माहौल बनाना चाहिए। उन्हें आंदोलन छोड़ना चाहिए और वार्ता चुननी चाहिए।'
किसानों को नहीं मंजूर केंद्र की शर्त
किसानों की बैठक के बाद लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के प्रदेश अध्यक्ष सरजीत सिंह फूल ने कहा, 'हमने केंद्र के निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया है क्योंकि यह इस शर्त के साथ आया है कि सभी किसानों को बुराड़ी पार्क में शिफ्ट कर देना चाहिए और अगले दिन सरकार से बातचीत होगी। हरियाणा सरकार ने हमारा रास्ता रोकने के लिए सड़कों को खोद दिया। अब जब सरकार ने शर्त रखी है तो हम बुराड़ी पार्क नहीं जाएंगे क्योंकि यह एक खुली हुई जेल है। हम दिल्ली में प्रवेश के सभी पांच बिंदुओं को अवरुद्ध करेंगे। हमारे आवास के लिए हमारा ट्रैक्टर छोटे कमरों की तरह हैं। हम किसी भी राजनीतिक दल को अपने मंच पर जगह नहीं देंगे। हमारे पास 4 महीने का राशन है, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। हमारी संचालन समिति सब कुछ तय करेगी।'
We've decided that we'll never go to Burari Park as we got proof that it's an open jail. Delhi Police told Uttarakhand Farmer Association President that they'll take them to Jantar Mantar but instead locked them at Burari Park: Surjeet S Phul, President, BKU Krantikari (Punjab) https://t.co/6pJOqIahh5 pic.twitter.com/97ePCMknnI
— ANI (@ANI) November 29, 2020
दोनों तरफ से बंद है सिंघू बॉर्डर
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने बताया, 'सिंघू बॉर्डर अभी भी दोनों ओर से बंद है। मुकरबा चौक और जीटीके रोड से ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। ट्रैफिक बहुत ज्यादा है। कृपया सिग्नेचर ब्रिज से रोहिणी और इसके विपरीत, GTK रोड, NH 44 और सिंघू बॉर्डर तक बाहरी रिंग रोड से बचें।'
बुराड़ी जाने से किसानों का इनकार
सिंघु बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा) पर मौजूद किसानों के नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा, 'हम बुराड़ी (दिल्ली) नहीं जाएंगे। हमारे 30 किसान संगठन सर्वसम्मति के बाद निर्णय लेते हैं। हमारे नेता आज बाद में इसके बारे में मीडिया को जानकारी देंगे।' गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से बुराड़ी के मैदान पर शिफ्ट होने के कहा है। ऐसा करने पर सरकार अगले दिन किसानों से बात करेगी।
राजनीति से प्रेरित नहीं किसान आंदोलन: शाह
मैंने कभी भी किसानों के विरोध को राजनीति से प्रेरित नहीं कहा, न ही मैं अब कह रहा हूं: हैदराबाद में गृह मंत्री अमित शाह
किसान आंदोलन को सुलझाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने संभाली कमान
जाब के किसानों के 'दिल्ली चलो' आंदोलन को सुलझाने के लिए मोदी सरकार की तरफ से खुद गृहमंत्री अमित शाह ने कमान संभाली है। एक महीने में यह दूसरा मौका है, जब गृहमंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप कर किसानों के आंदोलन से जारी गतिरोध को दूर करने की कोशिश की है। गृहमंत्री अमित शाह ने बीते शनिवार को आंदोलनत किसानों से जल्द से जल्द बातचीत का ऑफर दिया था। उन्होंने किसानों को बुराड़ी में निर्धारित ग्राउंड में एकत्र होने की अपील की थी। यह अलग बात है कि फिलहाल किसानों ने यह ऑफर ठुकरा दिया है। नगर निगम चुनाव की कैंपेनिंग करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह रविवार को हैदराबाद पहुंचे हैं। आईएनएस के अनुसार, उनके हैदराबाद से नई दिल्ली वापस आते ही किसानों के आंदोलन को सुलझाने के लिए सरकार की तरफ से तेज गति से फैसले हो सकते हैं।
किसानों का प्रदर्शन जारी
13 नवंबर को हुई थी केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक
नये कृषि कानून से संबंधित मसले समेत किसानों की समस्याओं को लेकर पंजाब के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच बीते दिनों 13 नवंबर को नई दिल्ली स्थित विज्ञान-भवन में हुई बैठक में कई घंटे तक बातचीत हुई थी और दोनों पक्षों ने आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।
किसानों के खिलाफ एक्शन पर हैरान हैं पंजाबी प्रवासी
नए कृषि कानूनों के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी आ रहे किसानों के शांतिपूर्ण मार्च को रोकने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस के गोले दागने और पानी की तेज धार छोड़ने जैसी 'क्रूरता' ने कनाडा में रह रहे प्रवासी भारतीयों को चिंतित और हैरान कर दिया है। उन्होंने भारत सरकार से किसानों के साथ एक खुली बातचीत करने को कहा है क्योंकि ये मामला उनकी आजीविका को प्रभावित करने वाला है। किसानों के समर्थन में आए कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ क्रूर होने की खबरें बहुत परेशान करने वाली थीं।
प्रदर्शनकारी अब भी दिल्ली के बॉर्डर पर जमे हुए हैं
केंद्र द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने आ रहे हजारों किसान एक और सर्द रात सड़क पर बिताने के साथ राष्ट्रीय राजधानी के सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर अब भी जमे हुए हैं। वहीं, किसान नेता सरकार द्वारा प्रस्तावित रणनीति पर मंथन कर रहे हैं। किसानों के आंदोलन की वजह से कई सड़क और दिल्ली आने वाले रास्ते बंद हैं जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से बुराड़ी मैदान में आकर प्रदर्शन करने की अपील की है और कहा कि वे जैसे ही निर्धारित स्थान पर जाएंगे, उसी समय केंद्र वार्ता को तैयार है।
राकेश टिकैत का सरकार पर निशाना
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत की अगुवाई में किसानों का काफिला गाजीपुर बॉर्डर पहुंच कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन कर रहा है। हालांकि गृह मंत्री अमित शाह के बातचीत करने के प्रस्ताव पर राकेश टिकैत ने आईएएनएस से कहा कि, सरकार बुराड़ी गांव के निरंकारी मैदान को दूसरा शाहीन बाग बनाना चाहती है, वो हम नहीं होने देंगे।
किसानों से तत्काल बातचीत की जाए : के सी त्यागी
केंद्र में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक दल जनता दल यूनाइटेड (जद-यू) के नेता के सी त्यागी ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा किसानों के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और किसानों को भारी नुकसान होगा, जबकि यह सच नहीं है। नए कृषि कानूनों में किसानों के लिए नए मौके खुले हैं और तभी राजग के सहयोगी के तौर पर हमने इन कानूनों को पारित करने में सरकार का सहयोग किया था। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा का स्वागत करते हैं और हमें विश्वास है कि एमएसपी व्यवस्था समाप्त नहीं की जाएगी।
कृषि कानूनों पर सरकार करे पुनर्विचार: मायावती
बसपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों का रविवार को समर्थन करते हुए केंद्र सरकार को इन कानूनों पर पुनर्विचार करने की सलाह दी। मायावती ने ट्वीट किया कि पूरे देश में किसान केंद्र सरकार द्वारा कृषि से संबंधित हाल में लागू किये गये तीन कानूनों को लेकर काफी नाराज हैं और इनके खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
लोगो को हो रही हैं दिक्कतें
दिल्ली में अन्य राज्यों से आने जाने वाले यात्रियों का कहना है कि सिंघू बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) पर रोड नाकेबंदी के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली आने वाले एक शख्स ने बताय, 'हम विरोध के कारण कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। स्थिर संचार के लिए कोई वाहन नहीं है। हमें कई तरह से दिक्कतें हो रही हैं।'
दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर भी प्रदर्शन
गाजियाबाद-दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने अपना विरोध जारी रखा है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, 'विरोध रामलीला मैदान में हो सकता है तो फिर हमें निजी सुविधा वाले निरंकारी भवन में क्यों जाना चाहिए? हम आज यहां रहेंगे।' इससे पहले शुक्रवार को सैकड़ों किसानों ने संत निरंकारी ग्राउंड पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश किया था।
खट्टर ने कही ये बात
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध राजनीतिक दलों द्वारा समर्थित है और इनका लिंक खालिस्तान से भी है। उन्होंने मीडिया को बताया, "राज्य को राष्ट्रीय राजधानी में और आसपास चल रहे किसानों के विरोध में खालिस्तान समर्थक नारे लगाने वाले कुछ अवांछित तत्वों के इनपुट मिले हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा, शाह की अपील को स्वीकार कर लें
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों से आग्रह किया कि वे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर एक निर्धारित स्थान पर शिफ्ट होने की अपील स्वीकार कर लें, इस प्रकार उनके मुद्दों को हल करने के लिए जल्द वार्ता का मार्ग प्रशस्त होगा। अमरिंदर सिंह ने किसानों के साथ जल्द से जल्द विचार-विमर्श करने की शाह की पेशकश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बड़े पैमाने पर किसान समुदाय और राष्ट्र के हित में है।
किसानों ने गाजियाबाद के यूपी गेट पर प्रदर्शन किया
त्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद स्थित यूपी गेट पर शनिवार को भारी संख्या में किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को जारी रखने के संबंध में लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। टिकैत ने कहा कि संगठन से जुड़े किसान दिल्ली के बुराड़ी मैदान नहीं जाएंगे, जहां धरना-प्रदर्शन की इजाजत दी गई है। आंदोलनरत किसान रविवार को आगे के कदमों को लेकर निर्णय करेंगे।
बॉर्डर पर सुरक्षाबल तैनात
सरकार ने कहा, किसानों से किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार
किसानों के लगातार तीसरे दिन भारी विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार ने शनिवार को कहा कि वह उनके साथ कभी भी बातचीत के लिए तैयार है और साथ ही उनसे आंदोलन बंद करने का आग्रह भी किया। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए तीन दिसंबर को 32 प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के साथ एक बैठक पहले ही निर्धारित की जा चुकी है, और यदि ये संगठन चाहें तो सरकार उनके नेताओं से पहले भी बातचीत करने के लिए तैयार है।


