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आजम खान को बड़ा झटका, कोर्ट ने सुनाई 10 साल की कैद और 14 लाख के जुर्माने की सजा; जानें क्या है मामला

Big Breaking: जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को एक और झटका लगा है। अदालत ने डूंगरपुर मामले में उन्हें 10 साल की कैद और 14 लाख रुपये के जुर्माने की सजा मुकर्रर की है। इस मामले में बरकत अली ठेकेदार को भी सजा सुनाई गई है। रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने सपा नेता को सजा सुनाई है।

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आजम खान को 10 साल की सजा।

Photo : Times Now Digital

Azam Khan News: रामपुर के सियासत में अच्छा खासा दबदबा रखने वाले समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जेल में बंद सपा के वरिष्ठ नेता को अदालत ने एक और तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने डूंगरपुर मामले में उन्हें 10 साल की कैद और 14 लाख रुपये के जुर्माने की सजा मुकर्रर की है। उनके अलावा इस मामले में बरकत अली ठेकेदार को भी सजा सुनाई गई है। आपको बताते हैं कि आखिर वो मामला क्या है, जिसमें आजम खान को अदालत ने सजा सुनाई है।

डूंगरपुर बस्ती को जबरन खानी कराने

आजम खान को 10 साल की कैद के अलावा 14 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। उनके अलावा बरकत अली को 7 साल की जेल और 6 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। दरअसल, ये मामला 6 दिसंबर 2016 का है। जिसमें सपा नेता आजम खान और बरकत अली ठेकेदार पर डूंगरपुर बस्ती को जबरन खाली कराने, मारपीट, तोड़फोड़, लूटपाट और लोगों को धमकाने का आरोप लगा था।

रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने सुनाई सजा

वर्ष 2019 में आजम खान के खिलाफ इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। अब रामपुर के एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने उनके खिलाफ सजा सुनाई है। हाल ही में आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा जेल से बाहर आ गई हैं। उन्हें पिछले दिनों ही जमानत मिली थी। जेल से रिहा होने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा ने कहा था कि यह अन्याय की हार है और न्याय की जीत हुई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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