'योगी मॉडल' ने बदली यूपी की तस्वीर, तीन साल में ये हैं सीएम आदित्यनाथ के 5 बड़े फैसले

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Updated Mar 18, 2020 | 11:09 IST

Three Years of Yogi Adityanath: योगी आदित्यनाथ को यह बात अच्छी तरह पता थी कि प्रदेश का माहौल बदले बिना राज्य में विकास संभव नहीं है। इसके लिए उन्होंने कानून-व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई।

Yogi model worked in Uttar Pradesh, five big decisions of yogi adityanath
योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी को दी है नई पहचान। 

मुख्य बातें

  • उत्तर प्रदेश में तीन का कार्यकाल पूरा करने वाले भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं योगी आदित्यनाथ
  • अपने तीन साल के कार्यकाल में सीएम आदित्यनाथ ने राज्य के प्रति लोगों का नजरिया बदल दिया है
  • राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है योगी सरकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था पर उठाए बड़े कदम

लखनऊ : तीन साल पहले योगी आदित्यनाथ ने जब सूबे की कमान संभाली तो उस समय राज्य कई तरह की समस्याओं से ग्रसित था। उस समय राज्य किसानों की आत्महत्या, दंगों, सामाजिक तनाव, महिलाओं और बच्चियों की असुरक्षा और अर्थव्यवस्था की बदहाली से गुजर रहा था। योगी सरकार ने सरकार बनते ही राज्य के चौतरफा विकास के लिए अपना 100 दिन का एजेंडा तय किया और कैबिनेट की अपनी पहली बैठक में 86 लाख से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया। सत्ता में आने के बाद प्रदेश के प्रति लोगों का नजरिया बदलना एवं कानून व्यवस्था का राज स्थापित करना योगी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। 

योगी आदित्यनाथ को यह बात अच्छी तरह पता थी कि प्रदेश का माहौल बदले बिना राज्य में विकास संभव नहीं है। इसके लिए उन्होंने कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का अनुसरण करते हुए अपराधियों एवं गुंडों को या तो जेल में रहने या प्रदेश छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया। इससे राज्य में भयमुक्त समाज के अवधारणा को बल मिला और माफियारज, गुंडाराज और अपहरण से लोगों को मुक्ति मिली। तीन के साल के अपने कामकाज से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने प्रदेश के प्रति लोगों का नजरिया बदल दिया है। कल तक बीमारू और बदहाल राज्य के रूप में पहचाने जाने वाला यह राज्य तरक्की की राह पर अग्रसर है। प्रदेश के इस चौतरफे विकास को 'योगी मॉडल' के रूप में देखा जा रहा है। यहां एक नजर डालते हैं योगी सरकार के पांच उन फैसलों पर जिन्होंने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है- 

एक्सप्रेस-वे देंगे विकास को नई रफ्तार
किसी क्षेत्र के विकास के लिए कनेक्टिविटी बहुत मायने रखती है लेकिन इतने बड़े प्रदेश के बड़े शहरों को (आगर-लखनऊ एक्सप्रेस वे को छोड़कर) एक्सप्रेस-वे के जरिए आपस में जोड़ने की बड़ी एवं महात्वाकांक्षी पहल अब तक नहीं हुई थी।  योगी आदित्यनाथ ने शहरों को एक्सप्रेस-वे से जोड़ने एवं विकास को तीव्र गति देने की पहल की। योगी सरकार ने देश के सबसे बड़े पू्र्वांचल एक्सप्रेस-वे पर काम शुरू किया।

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मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे को बढ़ाकर वाराणसी तक ले जाया जाएगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर काम शुरू होने जा रहा है। लखनऊ के बाद कानपुर में मेट्रो परियोजना पर काम शुरू हो गया है। आने वाले समय में गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी और आगरा में मेट्रो सेवा शुरू करने का प्रस्ताव है। योगी सरकार प्रदेश के शहरों को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने का भी काम तेजी के साथ कर रही है। अब राज्य में एयरपोर्ट की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। जेवर और कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास तेजी से चल रहा है। 

संस्कृति एवं पर्यटन को मिली नई पहचान
सांस्कृतिक रूप से धनी एवं पर्यटन की असीम संभावनाएं रखने वाला यह राज्य अभी तक अपनी विरासत को संवार नहीं पाया था। योगी आदित्यनाथ ने सरकार में आते ही सांस्कृतिक उत्थान एवं पर्यटन के विकास को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। योगी सरकार के प्रयासों से बीते तीन सालों में पर्यटन क्षेत्र का तेजी के साथ विकास हुआ है। प्रयागराज में करीब 25 करोड़ से अधिक लोग कुंभ में आए। इस बार दीपावली के मौके पर अयोध्या में 3.31 लाख दीप प्रज्ज्वलित हुए जो कि विश्व रिकॉर्ड बना।

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इसी तरह मथुरा में कृष्णोत्सव एवं रंगोत्सव के आयोजनों ने सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती दी। प्रदेश के सभी जिलों की अपनी एक खासियत है। जिलों के उत्पादों को एक पहचान एवं अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के लिए  योगी सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट नाम से योजना शुरू की। इससे जिले के विशिष्ट उत्पादों को बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। यह योजना खासकर ग्रामीण समाज के हस्तशिल्प को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई है।

कानून व्यवस्था का राज कायम, अपराधियों में खौफ
मार्च 2017 में सूबे की कमान संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती राज्य में कानून का राज स्थापित करने की थी। योगी आदित्यनाथ को यह बात अच्छी तरह से पता थी कि उत्तर प्रदेश के माहौल को सुधारे बिना राज्य को विकास के रास्ते पर नहीं ले जाया जा सकता। राज्य में अपराधियों, बदमाशों एवं असमाजिक तत्वों का भय समाप्त करने और कानून का राज स्थापित करने के लिए योगी सरकार ने सख्त फैसले लिए।

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योगी सरकार की सख्त नीतियों के चलते करीब 16 हजार अपराधी जमानत निरस्त कराकर वापस जेल में चले गए। बीते ढाई वर्षों में पुलिस के साथ मुठभेड़ में 94 अपराधी मारे गए और 10098 अपराधी गिरफ्तार हुए। पुलिस की कार्रवाई में 742 पुलिसकर्मी घायल हुए और पांच पुलिसकर्मी शहीद हुए। राज्य सरकार ने भू-माफियाओं एवं अपरधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी करीब एक अरब से ज्यादा की संपत्ति जब्त की। प्रदेश के हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड के गठन से मनचलों की इरादों पर नकेल कसी गई। सरकार के इस कदम से महिलाओं ने काफी राहत महसूस की।

अन्नदाता के हित में बड़े फैसले
उत्तर प्रदेश कृषि आधारित समाज है और कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का मूल आधार है। किसानों के ऋण संकट से उबारने के लिए योगी सरकार सत्ता में आते ही 86 लाख लघु एवं सीमांत किसानों का 36,000 करोड़ रुपए का ऋण माफ किया। साथ ही 73 हजार करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान कराया। किसानों से उनके फसलों की खरीद के लिए नई खरीद नीति लागू की गई और इसके जरिए 50 लाख से अधिक किसानों का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया गया। साथ ही गेहूं और धान के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई। योगी सरकार ने सरकारी क्रय केंद्रों के माध्यम से सीधे किसानों से 126 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 101 लाख मीट्रिक टन धान का रिकॉर्ड खरीद की। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से राज्य के 2 करोड़ 33 लाख किसान परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। यही नहीं, राज्य में किसानों को चार करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड और 71 लाख किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए हैं। पिछले ढाई वर्षों में 1 लाख 54 हजार 577 करोड़ रुपए का फसल ऋण वितरित किया गया है।

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शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव के लिए उठाए बड़े कदम 
योगी आदित्यनाथ ने राज्य में शिक्षा एवं स्वास्थ्य को एक नई दिशा दी है। सरकार ने पिछले तीन साल के अपने कार्यकाल में इन दोनों क्षेत्रों में बड़े कदम उठाए हैं और इस बदलाव को महसूस किया जा रहा है। स्कूल चलो अभियान के तहत इस साल 1.80 करोड़ बच्चों का नामांकन हुआ है जबकि 15000 प्राथमिक विद्यालयों एवं 1000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया गया है। साथ ही कक्षा 1 से आठ तक के सभी बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, यूनीफार्म, स्कूल बैग, स्वेटर, जूता, ड्रेस एवं मोजा दिया जा रहा है। सरकार बालिकाओं को ग्रेजुएट स्तर तक की शिक्षा मुफ्त दे रही है। सरकार ने गुणवत्तापरक शिक्षा पर जोर देते हुए स्कूलों (मदरसों) में एनसीआरटी की पुस्तकें लागू की हैं। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए साल 2018 में 45 हजार से ज्यादा शिक्षकों का चयन किया गया। सरकार ने माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। उच्च शिक्षा के लिए राज्य सरकार 51 नए राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना पर काम कर रही है। सरकार ने राज्य में कई स्थानों पर नए पॉलीटेक्निक भी बना रही है।

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योगी सरकार के कार्यकाल में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी किया है। लोगों की जरूरतों को देखते हुए राज्य में नए मेडिकल की स्थापना हो रही है और जो पहले से मौजूद हैं उनमें जांच उपकरणों को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार इंसेफेलाइटिस, काला ज्वार, मलेरिया सहित कई संक्रामक बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया है। पिछले ढाई वर्षों में सरकार के प्रयासों से घातक रोग के मामलों में 35 फीसदी की कमी हुई है। राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में मेडिकल यूनिवर्सिटी, 2 एम्स और 15 नए मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। 

डिस्क्लेमर: इस प्रस्तुत लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।

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