अमित शाह का चेन्नई दौरा सियासी तौर पर इतना महत्वपूर्ण क्यों, यहां समझें

देश
ललित राय
Updated Nov 21, 2020 | 16:24 IST

गृहमंत्री अमित शाह के चेन्नई दौरे को अगर सियासी नजरिए से देखा जा रहा है तो उसके पीछे कुछ ठोस वजह है।

अमित शाह का चेन्नई दौरा सियासी तौर पर इतना महत्वपूर्ण क्यों, यहां समझें
चेन्नई में गृहमंत्री अमित शाह 

मुख्य बातें

  • चेन्नई के दौरे पर हैं गृहमंत्री अमित शाह, अगले साल विधानसभा चुनाव की वजह से दौरा अहम
  • अलागीरी के कट्टर समर्थक बीजेपी में हुए शामिल
  • अगर अलगीरी अलग पार्टी बनाते हैं तो बीजेपी के साथ हो सकता गै गठबंधन

चेन्नई। गृहमंत्री अमित शाह तमिलनाडु के दौरे पर हैं जहां वो कई परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। लेकिन उनका यह दौरा विकास कार्यों की ईंट से ज्यादा सियासी तारों से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसा  कहा जा रहा है कि एम के अलागीरी की शाह से मुलाकात हो सकती है और इसके साथ रजनीकांत से भी भेंट होगी। इस संबंध में अलागिरी के करीब रामलिंगम जो अब बीजेपी का हिस्सा बन चुके हैं उन्गोंने जानकारी दी। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या है शाह के चेन्नई के दौरे को सियासी नजरिए से अहम माना जा रहा है। 

शाह के दौरे के सियासी मायने
अमित शाह के दौरे से पहले तमिलनाडु की सियासत को समझना जरूरी है। राज्य में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं और एआईएडीएमके और डीएमके के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। लेकिन इन सबके बीच डीएमके के मुखिया एम के स्टालिन और उनके भाई एम के अलागीरी के बीच जो रिश्ता है उसे समझना जरूरी है। यह हर किसी को पता है कि अलागीरी और स्टालिन के बीच रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे और इस पृष्ठभूमि में बीजेपी को लगता है कि अगर अलागीरी अलग पार्टी बनाते हैं तो सुदुर दक्षिण में बीजेपी खाता खोल सकती है। 

अलागीरी और स्टालिन में रहे हैं खट्टे रिश्ते
अगर अलागीरी और स्टालिन की राजनीति को देखें तो अलागीरी कभी मदुरै की राजनीति से बाहर नहीं निकले जबकि स्टालिन चेन्नई यानी पूरे प्रदेश की राजनीति करते रहे। अगर एम करुणानिधि के साथ स्टालिन और अलागीरी के रिश्ते को देखा जाए तो करुणानिधि की पहली पसंद स्टालिन ही रहे। स्टालिन पार्टी के जब अध्यक्ष बने तो पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से अलागीरी को बाहर का रास्ता दिखा दिया। करुणानिधि की मौत के बाद अलागीरी ने यह भी कहा कि स्टालिन के हाथों में भविष्य सुरक्षित नहीं है। लेकिन डीएमके के नेता कहते हैं कि अलागीरी के पास न तो समर्थक हैं और ना ही पैसा है, वो एक या दो दिन तक हेडलाइन बनकर रह जाएंगे। 

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