क्या है निशान साहिब? लाल किले की प्राचीर पर इस झंडे को प्रर्दशनकारियों ने फहराया

कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि लाल किले पर प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे को हटाकर अपना झंडा लगाया। लेकिन घटना का जो वीडियो सामने आया है उसमें स्पष्ट है कि तिरंगे को हाथ नहीं लगाया गया।

What is Nishan Sahib? protestors hoisted it on Red Fort
क्या है निशान साहिब?  |  तस्वीर साभार: PTI

नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार को लाल किले की प्राचीर पर प्रदर्शनकारियों ने निशान साहिब झंडा फहराया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने खालिस्तानी झंडा फहराया। यह सही नहीं है, दरअसल प्रदर्शनकारियों ने जो झंडा फहराया वह प्रत्येक गुरुद्वारे के शिखर पर लगाया जाता है और सिख समुदाय के लोग अपने हर धार्मिक जुलूस में अपने इस सिख झंडे 'निशान साहिब' को लेकर चलते हैं। गुरुद्वारों के शिखर पर एक खंड (कृपाण) के साथ 'निशान साहिब' को फहराए जाने की परंपरा है। 

प्रत्यके गुरुद्वारे के शिखर पर पाया जाता है निशान साहिब
सेना के सिख रेजिमेंट के प्रत्येक गुरुद्वारे में निशान साहिब या 'सिख झंडा' फहराया जाता है। सिख रेजिमेंट जब एक जगह से दूसरी जगह कूच करती है तो वह गुरुग्रंथ साहिब के 'बीर' के साथ-साथ अपने सिख झंडे को भी ले जाती है। सेना के जवान और अधिकारी इस झंडे का काफी सम्मान करते हैं। सेना की हर छावनी के गुरुद्वारे में निशान साहिब का होना अनिवार्य होता है। सिख रेजिमेंट एवं सिख लाइट इन्फैंट्री का वार क्रॉय 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' है और सिख रेजिमेंट को मोटो है, 'निश्चय कर अपनी जीत करूं'। यह पंक्ति गुरु गोविंद सिंह के एक भजन से ली गई है। सिख लाइट इन्फैंट्री का रेजिमेंटल मोटो 'देग तेग फहत (शांति में समृद्धि, युद्ध में विजय) है। लाल किले पर प्रदर्शन और ट्रैक्टर रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के नारे लगाते पाए गए।

लाल किले पर तिरंगे को हाथ नहीं लगाया
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि लाल किले पर प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे को हटाकर अपना झंडा लगाया। लेकिन घटना का जो वीडियो सामने आया है उसमें स्पष्ट है कि प्रदर्शनकारियों ने प्राचीर पर लहरने वाले तिरंगे झंडे को हाथ नहीं लगाया। एक प्रदर्शनकारी 'सिख झंडे' को लेकर एक खाली पोल पर चढ़ा और उसे फहराया। किसी ने वहां तिरंगे को हाथ नहीं लगाया। कुछ प्रदर्शनकारी सिख झंडे के साथ तिरंगे और किसान यूनियन के झंडे को अपने साथ लिये हुए थे।        

इस घटना से आहत है देश
बता दें कि लाल किले पर हुए प्रदर्शकारियों के उपद्रव से पूरा देश आहत है। लोगों का मानना है कि इस हिंसक प्रदर्शन से किसान आंदोलन कमजोर हुआ है। आईटीओ सहित राजधानी के अलग-अलग इलाकों में हुई झड़पों में दिल्ली पुलिस के करीब 86 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मियों पर हमला करते हुए देखा जा सकता है। दिल्ली पुलिस ने अब तक 26 एफआईआर दर्ज किया है और सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल रिकॉर्डिंग के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है। 

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