UP Assembly Polls: असदुद्दीन ओवैसी के लिए क्‍या है 2022 का प्‍लान? क्‍या जेवर से बदल गया यूपी के 'वोट युद्ध' का प्‍लान?

उत्‍तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी टीका-टिप्‍पणियों का दौर तेज होता रहा है। यूपी चुनाव में जहां AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं चुनाव से चंद महीने पहले जेवर एयरपोर्ट के शिलान्‍यास को भी सियासी तौर पर बेहद महत्‍वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

UP Assembly Polls: असदुद्दीन ओवैसी के लिए क्‍या है 2022 का प्‍लान? क्‍या जेवर से बदल गया यूपी के 'वोट युद्ध' का प्‍लान?
UP Assembly Polls: असदुद्दीन ओवैसी के लिए क्‍या है 2022 का प्‍लान? क्‍या जेवर से बदल गया यूपी के 'वोट युद्ध' का प्‍लान? 

यूपी की लड़ाई दिन-ब-दिन तीखी और तेज होती जा रही है। वोट युद्ध जीतने के लिए हर दिग्गज अपने अपने दांव आजमा रहा है। आज मोदी और योगी ने जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास कर पश्चिमी यूपी को साधने की कोशिश की तो अखिलेश यादव ने लखनऊ में हुंकार भरी। राजनाथ सिंह सीतापुर में थे तो असदुद्दीन ओवैसी पूर्वांचल में थे, जौनपुर में। वही ओवैसी जिनके बारे में 24 घंटे पहले ही बड़ी खबर आई थी। राजभर के बयान से संकेत मिला था कि अखिलेश यादव औवैसी और केजरीवाल की पार्टी से गठबंधन कर यूपी में बहुत बड़ा प्रयोग करने वाले हैं। मुस्लिम वोटों को बचाने के लिए औवैसी को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।

सवाल सच का है? क्या अखिलेश और ओवैसी गठबंधन करने वाले हैं? क्या ओवैसी साइकिल का साथ देकर योगी को रोकने के मिशन में जुटने वाले हैं। ये राजभर ने जो कुछ कहा वो महज एक अफवाह भर है। अगर ओवैसी अखिलेश यादव के साथ जाते हैं तो उनकी शर्तें क्या होगी? अगर नहीं जाते हैं तो आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? इन सभी सवालों का जवाब ना सिर्फ यूपी की जनता बल्कि पूरा देश जानना चाहता है। इसीलिए टाइम्स नाउ नवभारत की संवाददाता नैना यादव ने जौनपुर में असदुद्दीन ओवैसी से EXCLUSIVE बात की। इस दौरान ओवैसी से वो हर सवाल पूछे गए, जो वोटर के मन में है, जिसका जवाब वो जानना चाहते हैं।

और अब बात उस जेवर एयरपोर्ट की, जिसका पीएम मोदी ने शिलान्यास किया। मोदी और योगी की जोड़ी ने जेवर के मंच से यूपी चुनाव का तेवर बदलने की भरपूर कोशिश की। योगी ने तो पश्चिमी यूपी की लड़ाई को गन्ना और जिन्ना की लड़ाई बता दिया। वहीं अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार इस एयपोर्ट को भी प्राइवेट हाथों में बेच देगी। तो जिन्ना और गन्ना का युद्ध तो अपनी जगह है, लेकिन सवाल ये है कि अखिलेश यादव ने एयरपोर्ट और एयरलाइंस को लेकर मोदी और योगी पर जो हमला बोला, उसमें कितना दम है?

दरअसल अखिलेश यादव ने जो कहा उसकी कई बातें सच हैं। देश के करीब 85 फीसदी सरकारी एयरपोर्ट घाटे में चल रहे हैं। ये भी सच है कि सरकार मार्च 2022 तक 13 सरकारी हवाई अड्डों का निजीकरण करेगी। 2025 तक देश के 25 एयरपोर्ट को प्राइवेट सेक्टर के हाथों में देने का प्लान है। लेकिन ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि इन एयरपोर्ट की दशा और दिशा सुधर सके। रही बात एयरइंडिया के घाटे की तो इसके लिए सिर्फ मोदी सरकार जिम्मेदार नहीं है। एयर इंडिया की जो हालत अभी है, उसके लिए पिछली सरकारें और उनकी बेरुखी भी जिम्मेदार है।

चुनाव से पहले जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास हुआ। टाइमिंग ऐसी है कि इसे चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि मोदी योगी ने जेवर एयरपोर्ट से यूपी चुनाव के तेवर को बदलने की कोशिश की है, पश्चिमी यूपी को साधने की कोशिश की है। वही पश्चिमी यूपी जहां किसान आंदोलन से बीजेपी को नुकसान की आशंका है। तो सवाल ये है कि आखिर इस जेवर एयरपोर्ट के बारे में पश्चिमी यूपी का क्या ओपिनियन है?

और अब बात मध्य प्रदेश से। आज भोपाल में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI पर पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया। पुलिस के इस एक्शन में कई कार्यकर्ता घायल हो गए। दरअसल महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा नीति के खिलाफ छात्र संगठन सीएम के घर का घेराव करना चाहता था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। BJP कह रही है NSUI के छात्रों के पत्थरबाजी करने पर एक्शन लेना पड़ा, जबकि कांग्रेस का आरोप है- जानबूझकर 'सबक सिखाने' की नीयत से लाठियां भांजी गई।

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