UN on Pegasus Case:UN बोला मानवाधिकारों का उल्लंघन होने वाली निगरानी तकनीकों पर तत्काल लगाम लगाएं सरकारें 

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 20, 2021, 07:20 AM IST

Pegasus Update : एक वैश्विक मीडिया संघ की जांच से पता चला है कि इजरायल स्थित एनएसओ ग्रुप के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों की जासूसी करने के लिए किया जा रहा है।

 UN on Pegasus Case:UN बोला मानवाधिकारों का उल्लंघन होने वाली निगरानी तकनीकों पर तत्काल लगाम लगाएं सरकारें 

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने दुनिया भर में पत्रकारों, मानवाधिकार रक्षकों, राजनेताओं की जासूसी करने के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर के उपयोग को ''बेहद चिंताजनक'' बताते हुए सोमवार को सरकारों से उनकी उन निगरानी तकनीकों पर तत्काल लगाम लगाने का आह्वान किया, जिनसे मानवाधिकारों का उल्लंघन होता हो।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट ने एक बयान में कहा, ''विभिन्न देशों में पत्रकारों, मानवाधिकार रक्षकों, राजनेताओं और अन्य लोगों की जासूसी करने के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर के उपयोग के बारे में खुलासे बेहद चिंताजनक हैं। सरकारों को अपनी उन निगरानी तकनीकों पर तत्काल लगाम लगानी चाहिये, जिनसे मानवाधिकारों का उल्लंघन होता हो।''

पेगासस स्पाईवेयर के जरिये जासूसी का मसला पकड़ रहा जोर 

इजरायली कंपनी के पेगासस स्पाईवेयर के जरिये देश के पत्रकारों और कुछ अन्‍य विश‍िष्‍ट लोगों की कथित जासूसी का मसला जोर पकड़ता जा रहा है। विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार सरकार इसे लेकर विपक्ष के निशाने पर रही। मसले पर स्‍पष्‍टीकरण की मांग के बीच केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इस पर सरकार का रुख स्‍पष्‍ट किया है।

'यह रिपोर्ट संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले आई और यह संयोग नहीं हो सकता'

केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने सोमवार को लोकसभा में 'पेगासस प्रोजेक्‍ट को लेकर कहा, 'कल रात एक वेब पोर्टल द्वारा एक बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित की गई। इसमें कई आरोप लगाए गए। यह रिपोर्ट संसद के मानसून सत्र से महज एक दिन पहले आई और यह महज संयोग नहीं हो सकता।' उन्‍होंने कहा, 'पहले भी WhatsApp पर Pegasus के इस्तेमाल को लेकर इसी तरह के दावे किए गए थे। उन रिपोर्टों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था और सभी पक्षों द्वारा उनका खंडन किया गया था। 18 जुलाई, 2021 की प्रेस रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र और इसकी स्थापित संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश लगती है।

'हम उन लोगों को दोष नहीं दे सकते जिन्होंने समाचार को विस्तार से नहीं पढ़ा है'

केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'हम उन लोगों को दोष नहीं दे सकते जिन्होंने समाचार को विस्तार से नहीं पढ़ा है। मैं सदन के सभी सदस्यों से तथ्यों और तर्क पर मुद्दों को परखने की अपील करता हूं। इस रिपोर्ट का आधार यह है कि एक संघ है, जिसकी पहुंच 50,000 फोन नंबर्स के लीक हुए डेटाबेस तक है। आरोप है कि इन फोन नंबरों से जुड़े लोगों की जासूसी की जा रही है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा में एक फोन नंबर की मौजूदगी से यह पता नहीं चलता है कि डिवाइस पेगासस से संक्रमित था या इसे हैक करने की कोशिश की गई।'

पेगासस मुद्दे को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'राहुल गांधी, अपने (सरकार के) मंत्रियों को जासूसी की गई है। हमारे सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की भी जासूसी गई है। पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा , कई मीडिया समूहों की जासूसी कराई गई। क्या किसी सरकार ने इस तरह का कुकृत्य किया होगा? भाजपा अब 'भारतीय जासूस पार्टी' बन गई है। मोदी जी, आप राहुल गांधी जी की फोन की जासूसी करवाकर कौन से आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे थे? आप मीडिया समूहों और चुनाव आयुक्त की जासूसी करवाकर किस आतंकवादी से लड़ रहे थे? अपने खुद के कैबिनेट मंत्रियों की जासूसी करवाकर कौन से आतंकवाद से लड़ रहे थे?'

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