एकनाथ शिंदे के बगावती सुर से हिल गई उद्धव सरकार, कोंकन इलाके में है असर

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उलटफेर की संभावना प्रबल नजर आ रही है। शिवसेना के कद्दावर नेता एकनाथ शिंदे बगावती राह पर हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि उनकी बोली और भाषा उद्धव ठाकरे से अलग हो गई।

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शिवसेना के बड़े चेहरों में से एक हैं एकनाथ शिंदे 
मुख्य बातें
  • उद्धव ठाकरे सरकार के कद्दावर चेहरे हैं एकनाथ शिंदे
  • कोंकन इलाके में शिंदे का खासा असर
  • इस समय सूरत में एकनाथ शिंदे

सोमवार की बीती रात जब महाराष्ट्र विधानपरिषद के नतीजे आए तो किसी को पता नहीं था कि मंगलवार की सुबह शिवसेना के लिए अमंगल साबित होने वाली है। मंगलवार सुबह 9 बजे के करीब खबर आई कि सीएम उद्धव ठाकरे ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। सबको अचंभा इसलिए हुआ कि एक इमरजेंसी मीटिंग पहले हो चुकी थी। लेकिन दूसरी इमरजेंसी मीटिंग में मंत्रणा का विषय यह था कि सरकार को कैसे बचाया जाए क्योंकि शिवसेना के कद्दावर नेता और शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई से सैकड़ों किमी दूर सूरत से सरकार को अस्थिर कर चुके थे। इस समय सूरत में शिवसेना के कुल 35 विधायक हैं। इसका अर्थ यह है कि अगर इन विधायकों ने अंतिम रूप से मन बदल लिया हो तो उद्धव ठाकरे सरकार अल्पमत में है। इन सबके बीच हम एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे की सियासी पारी के बारे में बात करेंगे। 

सतारा के रहने वाले हैं एकनाथ शिंदे
एकनाथ शिंदे मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा के जावली तालूका के रहने वाले हैं जो कोंकन बेल्ट में आता है। ठाणे आने से पहले उन्होंने 11वीं की पढ़ाई मंगला हाईस्कूल एंड जूनियर कॉलेज से की थी। अपने परिवार के भरणपोषण के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी। हालांकि उनकी रुचि राजनीति में थी और समय के साथ फायदा मिला। 2014 में बीजेपी- शिवसेना सरकार में मंत्री बनने के बाद पढ़ाई एक बार फिर शुरू की और डिस्टेंस एजुकेशन के तहत यशवंत राव चौहान विश्नविद्यालय से ग्रेजुएशन की। 

1997 : पहली बार ठाणे नगर निगम के पार्षद चुने गए
2001 : ठाणे नगर निगम में सदन के नेता के पद पर निर्वाचित हुए।
2002 : दूसरी बार ठाणे नगर निगम के लिए चुने गए
2004: महाराष्ट्र विधान सभा के लिए चुने गए
2005 : शिवसेना के ठाणे जिला प्रमुख नियुक्त। पार्टी में इतने प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त होने वाले पहले विधायक
2009 : महाराष्ट्र विधान सभा के लिए निर्वाचित 
2014 : महाराष्ट्र विधान सभा के लिए निर्वाचित
अक्टूबर 2014 - दिसंबर 2014: विपक्ष के नेता महाराष्ट्र विधान सभा
2014 - 2019: महाराष्ट्र राज्य सरकार में पीडब्ल्यूडी (पीयू) के कैबिनेट मंत्री
2014 - 2019: ठाणे जिले के संरक्षक मंत्री
2018 : शिवसेना पार्टी के नेता नियुक्त
2019: महाराष्ट्र राज्य सरकार में सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री 
2019 : लगातार चौथी बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए
2019 : शिवसेना के विधायक दल के नेता के रूप में चुने गए
28 नवंबर 2019: महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री उद्धव जी ठाकरे की अध्यक्षता में महा-विकास-अघाड़ी के तहत कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली।
2019: शहरी विकास और लोक निर्माण मंत्री (सार्वजनिक उपक्रम) नियुक्त
2019: गृह मंत्री (कार्यवाहक) नियुक्त (28 नवंबर 2019 - 30 दिसंबर 2019)
2020: ठाणे जिले के संरक्षक मंत्री नियुक्त

राजनीतिक करियर
1970-80 के दशक में महाराष्ट्र के युवकों पर बाला साहेब ठाकरे का जबरदस्त असर था। जैसे आम युवक उनकी भाषण शैली से प्रभावित थे ठीक वैसे ही एकनाथ शिंदे भी प्रभावित हुए। इसके साथ ही वो ठाणे जिले के शिवसेना प्रमुख आनंद दिखे की कार्यशैली से भी प्रभावित हुए। 1980 में शिंदे शिवसेना के हिस्सा बने और धीरे धीरे राजनीतिक सीढ़ियों को चढ़ते हुए मंजिल की तरफ बढ़ने लगे। 1985 में वो एकाएक चर्चा में तब आए जब कर्नाटक महाराष्ट्र सीमा विवाद के आंदोलन में कूदे और चालीस दिन तक बेलारी जेल में बंद रहे। शिंदे की मेहनत रंग लाई और 1997 में ठाणे नगरपालिका में पार्षद चुने गए। 2001 में ठाणे नगर पालिका में नेता सदन चुने गए और 2004 तक इस पद पर आसीन रहे।2004 में बाला साहेब ठाकरे ने ठाणे से विधानसभा के लिए टिकट दिया और शानदार अंतर के साथ शिंदे ने जीत दर्ज की। 2005 में उन्हें शिवसेवा ठाणे जिला का अध्यक्ष बनाया गया। वो पहले ऐसे विधायक बने जिन्हें जिले की भी कमान दी गई। 

शिंदे 2009, 2014 और 2019 के बाद के विधानसभा चुनावों में विजयी हुए। 2014 के चुनावों के बाद, उन्हें शिवसेना के विधायक दल के नेता और बाद में महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया। एक महीने के भीतर, जैसा कि शिवसेना ने राज्य सरकार में शामिल होने का फैसला किया, उन्होंने लोक निर्माण विभाग (सार्वजनिक उपक्रम) मंत्री के रूप में शपथ ली और जनवरी 2019 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाली।

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