corona third wave news: कोरोना की तीसरी लहर की डर के पीछे ये हैं तीन मुख्य वजह, एक्सपर्ट्स राय

क्या हम कोरोना की तीसरी लहर की दहलीज पर खड़े हैं। दरअसल जानकार तीन वजहों के आधार पर इस तरह की आशंका जता रहे हैं कि हम तीसरी लहर का भी सामना कर सकते हैं।

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कोरोना की तीसरी लहर की डर के पीछे ये हैं तीन मुख्य वजह, एक्सपर्ट्स राय 

मुख्य बातें

  • कोरोना की तीसरी लहर का आंशका, एक्सपर्ट्स ने चेताया
  • वैक्सीनेशन की रफ्तार में कमी, आर्थिक गतिविधि में तेजी और कोविड प्रोटोकॉल का ना मानना
  • देश में अभी भी कोरोना के केस हर रोज 40 हजार से ज्यादा आ रहे हैं।

कोरोना की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई। लेकिन संशय कोरोना की तीसरी लहर पर है। मसलन कोरोना की दूसरी लहर ही अंतिम लहर साबित होगी या हम सबको और तबाही देखने के लिए तैयार होना पड़ेगा। इसे लेकर तरह तरह की जानकारियां सामने आती है। लेकिन जिस तरह से डेल्टा वैरिएंट में बदलाव हुआ है उसके बाद इस तरह की संभावना जताई जा रही है कि तीसरी लहर आ सकती है। 

वैक्सीनेशन की रफ्तार में कमी
अब इसके पीछे वजह क्या है उसे भी समझना होगा। पहले हर रोज करीब चालीस लाख डोज लग रहे थे। लेकिन अब संख्या घटकर 3.4 मिलियन हो गई है यानी कि वैक्सीनेशन के रफ्तार में कमी आई है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों से करीब 45 फीसद केस हर रोज सामने आ रहे हैं। इन आंकड़ों के बारे में यूबीएस सेक्यूरिटीज की मुख्य अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने अपना आंकलन किया है। 12 जुलाई तक, केवल 381 मिलियन खुराक दिए गए थे। 18 से ऊपर की 22.7 प्रतिशत आबादी ने पहली खुराक प्राप्त की है, जबकि 900 मिलियन में से केवल 5.4 प्रतिशत को ही दोनों खुराक प्राप्त हुई हैं। गुप्ता-जैन आगे कहते हैं कि आर्थिक संकेतक सामान्य हो रहे हैं, यूबीएस-इंडिया गतिविधि संकेतक के अनुसार, रेलवे और घरेलू एयरलाइन यात्री यातायात में और सुधार हुआ है, लेकिन अपडेटेड मामलों में गिरावट आई है।

आर्थिक गतिविधि में तेजी
इसके अलावा अब देश में आर्थिक गतिविधि में तेजी आई है और इस वजह से लोग बेरोक टोक इधर उधर जा रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि लोगों में कोविड प्रोटोकॉल को लेकर उदासीनता भी है। जिस तरह से डेल्टा वायरस में बदलाव हो रहा है और करीब 9 राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट आ चुका है उसे देखते हुए तीसरी लहर की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

कोविड-19 प्रोटोकॉल का ना मानना
रिपोर्ट के अनुसार, अधिक चिंताजनक बात यह है कि 20 प्रतिशत से अधिक केसलोएड जिलों में, जहां दूसरी लहर कम हो गई है, तीसरी लहर मजबूती से स्थापित हो गई है, जो एक महीने पहले केवल 5 प्रतिशत थी।20 प्रतिशत से अधिक जिलों में जहां मामले दैनिक आधार पर पिछले सप्ताह तक नए मामले सामने आए हैं, नए मामलों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि तीसरी लहर मजबूती से आ गई है। यह एक महीने पहले केवल 5 प्रतिशत की तुलना में है। रिपोर्ट में नोट्स।

ये भी हैं कुछ खास वजह
इसके अलावा जबकि गर्मी के मौसम की मांग पर बिजली की मांग में आंशिक रूप से 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, रेलवे माल ढुलाई में 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई है और इसे कैप करने के लिए मई के अंतिम सप्ताह के बाद पहली बार 12 जुलाई तक सभी वाहनों के पंजीकरण में 9 प्रतिशत की कमी आई है। बढ़ी हुई उत्पादन लागत को ऑफसेट करने के लिए ऑटो कंपनियों द्वारा घोषित मूल्य वृद्धि के कारण हो सकता है। फिर, जबकि श्रम बल की भागीदारी दर जून के अंत में 39.6 प्रतिशत से बढ़कर 40.6 प्रतिशत हो गई, शहरी और ग्रामीण बेरोजगारी में मामूली वृद्धि हुई है।इसके अलावा, नीचे के रुझान वाले मानसून से ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक की गर्मियों की फसल की बुवाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो कि 10 प्रतिशत नेगेटिव है।

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