Ram Temple: पहले छोड़ा साथ अब बदला विचार, शिवसेना का बयान- फिलहाल रोक देना चाहिए राम मंदिर निर्माण

देश
ललित राय
Updated May 21, 2020 | 22:19 IST

sanjay raut on ram temple construction: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना मुखर रही है। लेकिन अब उसके सुर कुछ बदले बदले नजर आ रहे हैं। राम के नाम पर जान देने वाले की बात करने वाले अब पीछे हट रहे हैं।

Ram Temple: पहले छोड़ा साथ अब बदला विचार, शिवसेना का बयान- फिलहाल रोक देना चाहिए राम मंदिर निर्माण
राम मंदिर निर्माण पर शिवसेना के बदले सुर 

मुख्य बातें

  • शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण रोक देना चाहिए
  • राम मंदिर परिसर में जमीन समतलीकरण के दौरान अवशेष मिले
  • क्या सरकार में बने रहने की मजबूरी में बदले शिवसेना के सुर

नई दिल्ली। शिवसेना जो खुद को राम मंदिर आंदोलन का सबसे बड़ा पैरोकार बताती थी उसके नजरिए में बड़ा बदलाव आया है। जिस पार्टी के नेताओं को सपने में भी राम मंदिर का निर्माण दिखाई देता था। अब उसका नजरिया बदल चुका है। आप इसे ऐसे भी मान सकते हैं कि जब सियासत सत्ताकेंद्रित हो जाती है तो आदर्शों की बलि देनी ही पड़ती है। महाराष्ट्र में इस समय एक ऐसी सरकार चल रही है जो वैचारिक धरातल पर एक दूसरे से इत्तेफाक नहीं रखते हैं लेकिन जब सबका दुश्मन साझा और शक्तिशाली हो तो विचारों को एक किनारे रखकर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

शिवसेना के बदले सुर


गुरुवार को रामजन्मभूमि परिसर में समतलीकरण के दौरान कुछ ऐसे अवशेष मिले जो चीख चीख कर यह गवाही दे रहे थे कि जमीन के नीचे और उसके ऊपर भी राम मंदिर ही रहा होगा। लेकिन जब इस विषय पर शिवसेवा प्रवक्ता संजय राउत से उनकी प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण को फिलहाल रोक देना उचित होगा। यह एक ऐसा बयान था जिसे शायद शिवसेना के कोर वोटर भी पचा न सके। लेकिन बयान तो बयान होते हैं और जब सरकार चलानी हो तो व्यवहार के आगे सिद्धांत कहां टिकते हैं। 

बीजेपी ने इस तरह दी प्रतिक्रिया

शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत  के सुर क्या बदले कि बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने दोहे के जरिए शिवसेना पर निशाना साधा। उन्होंने कुछ इस तरह अपनी भावना का इजहार किया।

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान

कितना बदल गया इनसान कितना बदल गया इनसान

सूरज न बदला चांद न बदला ना बदला रे आसमान

कितना बदल गया इनसान कितना बदल गया इनसान

सवाल यह है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने शपथ लेने के बाद कहा था कि सरकार के 100 दिन पूरा होने पर वो रामनगरी अयोध्या जाएंगे और वो अयोध्या गए भी। ऐसे में शिवसेना के रुख में क्या कोई बदलाव आ रहा है। क्या सरकार में बने रहने के लिए या न्यूनतम कार्यक्रम को अमल में लाने के लिए वो अपने एजेंडे से हट रहे हैं। इस बारे में कुछ जानकार कहते हैं कि प्रेसर पॉलिटिक्स का शिवसेना का रिकॉर्ड रहा है। उसके नेता बोल्ड फैसले लेते रहे हैं लेकिन विचारधारा के साथ डटे रहे। लेकिन सरकार चलाने की अपनी मजबूरी होती है और उसके लिए कुछ इस तरह के बयान देते हैं  ताकि सहयोगी दलों के विचारों को भी सम्मान मिले क्योंकि कई कड़वे सवालों का सामना गठबंधन के दलों को करना पड़ता है। 

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