जानिए क्या है कारगिल युद्ध में ताशी नामग्याल के 'याक' का कनेक्शन

देश
Updated Jul 26, 2019 | 12:47 IST | मनोज यादव

Kargil War : ताशी नामग्याल एक किसान थे, जिनका याक कारगिल की पहाड़ियों में गायब हो गया था, जिसको खोजते-खोजते वे जब ऊंचाई पर चढ़ें तो उन्हें वहा पर कुछ संदिग्ध लोग दिखाई दिए।

Kargil Vijay Diwas
परमाणु बम बनाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहला सशस्त्र संघर्ष था।   |  तस्वीर साभार: PTI
मुख्य बातें
  • 1999 की सर्दियों में कारगिल की चोटियों पर पाक फौज ने किया कब्जा
  • कारगिल को खुफिया एजेंसी रॉ की नाकामी बताया जाता है
  • करीब दो महीने तक चला था कारगिल का युद्ध, पाक को मिली हार

देश में आज कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। 1999 में आज ही के दिन भारत के वीर जवानों ने कारगिल की चोटी से पाकिस्तानी फौज को खदेड़कर तिरंगा फहराया था। हालांकि, कारगिल के इस जंग में हमारे देश के सैकड़ों जवान शहीद हो गए थे। देश में हर साल इसे विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सशस्त्र बलों के बहादुर सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता दिखाई जाती है, जिन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा कब्जे में लिए गए क्षेत्र पर फिर से तिरंगा फहराने के लिए अपनी जिंदगी को कुर्बान कर दिया। 

क्या है कारगिल युद्ध का 'याक' कनेक्शन 
1999 में मई के महीने में एक दिन ताशी नामग्याल नाम के शख्श का 'याक' गायब हो गया। ताशी नामग्याल कारगिल के बाल्टिक सेक्टर में अपने याक की तलाश कर रहे थे। उसकी खोज में वे ऊपर पहाड़ियों पर चढ़ गए। पहाड़ियों पर याक की खोज में टहलते-टहलते उन्हें अपना याक तो मिल गया, लेकिन उसके साथ उन्हें वहां पर कुछ संदिग्ध लोग दिखाई दिए। जिनके बारे में उन्होंने भारतीय सेना को जानकारी दी। कारगिल युद्ध के शुरुआत का यही याक कनेक्शन है, जो युद्ध की पहली घटना है। 

सिंधु नदी के तट पर बसा है ताशी गारकौन गांव
ताशी नामग्याल एक गरीब किसान थे। उन्होंने 12,000 रुपये में याक खरीदा था। एक किसान के लिए 12,000 रुपये के याक का गायब हो जाना काफी मुसीबत खड़ी करने वाला था। ताशी नामग्याल का घर कारगिल से साठ किलोमीटर की दूरी पर सिंधु नदी के किनारे ताशी गारकौन नामक गांव में है। ताशी नामग्याल बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं। ताशी की सूचना पर ही कारगिल युद्ध लड़ा गया, जिसमें 527 जवानों को शहादत देनी पड़ी।

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कारगिल युद्ध का दूसरा नाम 'ऑपरेशन विजय' है
कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के कारगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है। पाकिस्तान की सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा पार करके भारत की ज़मीन पर कब्जा करने की कोशिश की। पाकिस्तान ने दावा किया कि लड़ने वाले सभी कश्मीरी आंतवादी हैं, लेकिन युद्ध में बरामद हुए दस्तावेज़ों और पाकिस्तानी नेताओं के बयानों से साबित हुआ कि पाकिस्तान की सेना प्रत्यक्ष रूप में इस युद्ध में शामिल थी। लगभग 30,000 भारतीय सैनिक और करीब 5,000 घुसपैठिए इस युद्ध में शामिल थे। 

Kargil warदो परमाणु संपन्न देशों के बीच हुआ पहला सशस्त्र संघर्ष 
भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाली जगहों पर हमला किया और धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से पाकिस्तान को सीमा पार वापिस जाने को मजबूर किया। यह युद्ध ऊंचाई वाले इलाके पर हुआ और दोनों देशों की सेनाओं को लड़ने में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। परमाणु बम बनाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहला सशस्त्र संघर्ष था। करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में लड़ी गई इस जंग में देश ने लगभग 527 से ज्यादा वीर जवानों को खो दिया, वहीं 1,300 से ज्यादा जवान घायल हुए थे।

(डिस्क्लेमर : मनोज यादव अतिथि लेखक हैं और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)
 

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