Hathras Gangrape Case:हाथरस केस में 'सुप्रीम' फैसला, यूपी से बाहर अभी ट्रायल नहीं लेकिन हाईकोर्ट करेगा निगरानी

देश
ललित राय
Updated Oct 27, 2020 | 13:27 IST

Supreme court on Hathras gangrape case: हाथरस गैंगरेप और हत्या केस का ट्रायल बाहर कराए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है।

Hathras Gangrape Case : हाथरस गैंगरेप केस में सुप्रीम फैसला
हाथरस गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला 

मुख्य बातें

  • 29 सितंबर को हाथरस गैंगरेप की शिकार युवती हुई थी मौत
  • एसआईटी जांच के दौरान यूपी सरकार ने केस को सीबीआई के हवाले किया
  • पीड़ित परिवार ने अदालत की निगरानी में जांच और केस यूपी से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है

नई दिल्ली। हाथरस गैंगरेप केस की जांच के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि फिलहाल केस को ट्रायल के लिए दिल्ली से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इसके साथ ही सीबीआई जांच की निगरानी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के हवाले कर दिया है। सीबीआई कर रही है। इस मामले में सीबीआई टीम कई बार पीड़िता के गांव का दौरा कर चुकी है, मामले की तह तक पहुंचने के लिए आरोपियों के साथ साथ पीड़ित परिवार से कई दौर की पूछताछ हुई है। लेकिन यूपी सरकार ने जब सीबीआई जांच के आदेश दिए उस वक्त पीड़ित परिवार ने कहा कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। इसके साथ ही इस केस को यूपी से दिल्ली में ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई गई थी। 

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ का फैसला
सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली 3-न्यायाधीशों की पीठ का कहना है कि अब तक हाथरस मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए, सीबीआई के लिए जांच समाप्त करना उचित है और बाद में इसका फैसला किया जाएगा।

यह है पूरा मामला
अब यहां पूरे मामले को समझना जरूरी है, हाथरस गैंगरेप पीड़िता की मौत दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 29 सितंबर को हो गई थी। पीड़िता के शव को 29 तारीख की रात में ही गांव से बाहर जला दिया गया और उसके बाद सियासी बवाल बढ़ गया। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने बिना उसकी अनुमति के अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि जिला प्रशासन का कहना था कि अनुमलि ली गई थी। जब इस मामले पर सियासत तेज हुई तो तीन सदस्यों वाली एसआईटी बना दी गई और सात दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले पर पीड़ित परिवार को ऐतराज था और बाद में सरकार ने खुद ही जांच सीबीआई के हवाले कर दिया था। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए 12 अक्टूबर को प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर लिया। 

इन सबके बीच पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें सीबीआई जांच में भरोसा नहीं है, इस मामले की जांच अदालत की निगरानी में होने के साथ साथ मामले को यूपी के बाहर भेज दिया जाए। लेकिन अदालत ने कहा कि जब तक जांच हो रही है केस ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। लेकिन सीबीआई जांच की मॉनिटरिंग इलाहाबाद हाईकोर्ट करेगा। 

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