'आप पहले ही शहर का गला घोंट चुके हैं', किसान महापंचायत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तल्‍ख टिप्‍पणी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 1, 2021, 11:12 AM IST

Supreme court slams Kisan Mahapanchayat: किसान महापंचायत ने जंतर-मंतर पर सत्‍याग्रह की अनुमति मांगी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्‍ख टिप्‍पणी करते हुए कहा है कि आप पहले ही शहर का गला घोंट चुके हैं।

 'आप पहले ही शहर का गला घोंट चुके हैं', किसान महापंचायत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तल्‍ख टिप्‍पणी
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नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत की ओर से जंतर-मंतर पर सत्‍याग्रह की अनुमति की मांग को लेकर दायर याचिका पर तल्‍ख टिप्‍पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'आप पहले ही शहर का गला घोंट चुके हैं और अब आप शहर में प्रवेश करना करना चाहते हैं?' किसान महापंचायत ने पूर्व में संयुक्‍त किसान मोर्चा को मिली ऐसी ही अनुमति का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर सत्‍याग्रह की अनुमति मांगी थी।

किसान महापंचायत ने पूर्व में दिल्‍ली पुलिस से जंतर-मंतर पर सत्‍याग्रह की अनुमति मांगी थी, लेकिन दिल्‍ली पुलिस ने इससे इनकार कर दिया था, जिसके बाद किसान महापंचायत ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था। लेकिन यहां भी उसे शीर्ष अदालत के कड़े रुख का सामना करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने तल्‍ख लहजे में कहा, 'आपके अधिकार हो सकते हैं, लेकिन अधिकार आम नागरिकों के भी हैं। आप लोगों की सुरक्षा को भी बाधित कर रहे हैं।'

ट्रैफिक बाधित होने से बढ़ रही नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्‍पणी ऐसे समय में आई है कि जबकि केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को 10 माह से अधिक का समय बीत गया है। किसानों ने सोमवार (27 सितंबर) को भारत बंद भी बुलाया था, जिसका मिला-जुला असर देखने को मिला था। इस बीच दिल्‍ली बॉर्डर पर किसानों के धरना-प्रदर्शन के कारण लोगों को आवाजाही में हो रही मुश्किलों का मसला भी तूल पकड़ रहा है।

शीर्ष अदालत ने एक दिन पहले ही इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि धरना-प्रदर्शन केवल निर्दिष्ट स्थलों पर ही हो सकते हैं। सड़कों को इस तरह से जाम नहीं किया जाना चाहिए, क्‍योंकि इससे न सिर्फ राजस्व का संग्रह बंद है, बल्कि लोगों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि उसने इस संबंध में पहले ही आद‍ेश पारित कर दिया है, जिसे लागू करवाना अब सरकारों का काम है।

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