Muharram Julus Permission: मुहर्रम जुलूस को 'सुप्रीम' ना, 'ऐसे तो अराजकता फैल जाएगी'

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 27, 2020, 06:50 PM IST

SC Decision on Muharram Julus: सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम पर जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी। याचिकाकर्ता की दलील पर अदालत ने दिलचस्प जवाब भी दिया।

Muharram Julus Permission: मुहर्रम जुलूस को 'सुप्रीम' ना, 'ऐसे तो अराजकता फैल जाएगी'

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश भर में मुहर्रम जुलूस निकालने की अनुमति को अस्वीकार कर दिया और लखनऊ स्थित याचिकाकर्ता को अपनी याचिका के साथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष स्थानांतरित करने के लिए कहा।शीर्ष अदालत ने कहा कि यह पूरे देश के लिए एक सामान्य आदेश कैसे पारित कर सकता है।

अराजकता की नहीं दे सकते इजाजत
मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने कहा कि इससे एक विशेष समुदाय को अराजकता और निशाना बनाया जा सकेगा।“आप एक सामान्य आदेश के लिए कह रहे हैं और फिर अगर हम इसकी अनुमति देते हैं तो अराजकता होगी। कोविद को फैलाने के लिए विशेष समुदाय को लक्षित किया जाएगा। हम ऐसा नहीं चाहते हैं।

लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरे में नहीं डाल सकते
हम एक अदालत के रूप में सभी लोगों के स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं डाल सकते हैं।बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई की थी और अपनी टिप्पणी में लोगों के स्वास्थ्य का हवाला भी दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता को लखनऊ में जुलूस की सीमित प्रार्थना के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दी।शीर्ष अदालत शिया नेता सैयद कल्बे जवाद की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याची ने जगन्नाथपुरी यात्रा की दी थी दलील
मुहर्रम जुलूस के संबंध में याचिकाकर्ता के वकील ने जगन्नाथपुरी रथयात्रा का हवाला दिया। याची की दलील पर अदालत की टिप्पणी दिलचस्प थी। अदालत ने कहा कि आप तो पूरे देश के लिए इजाजत मांग रहे हैं और आप भी जानते हैं कि जगन्नाथपुरी यात्रा एक खास जगह पर होती है, जहां रथ एक जगह से दूसरी जगह जाता है। अगर आप किसी एक जगह से संबंध में अपील के साथ दलील देते तो खतरे का मूल्यांकन करने के बाद आदेश दिया जा सकता था। लेकिन वर्तमान माहौल में किसी भी तरह इस तरह का आदेश देना उचित नहीं होगा। 



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