कौन हैं सिरीशा बांदला, जो कल्‍पना चावला के बाद अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली होंगी भारत की दूसरी बेटी

भारतीय मूल की सिरीशा बांदला अंतरिक्ष की सैर पर जाने वाली हैं। वह कल्‍पना चावला के बाद भारत में जन्‍मी दूसरी भारतवंशी हैं, जो अंतरिक्ष की उड़ान भरने वाली हैं।

सिरीशा बांदला 11 जुलाई को अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगी
सिरीशा बांदला 11 जुलाई को अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगी  |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • सिरीशा बांदला 11 जुलाई को अंतरिक्ष की सैर पर रवाना होंगी
  • उनका जन्‍म आंध्र प्रदेश के गुंंटूर में हुआ था, जिससे यहां के लोग भी खुश हैं
  • वह कल्‍पना चावला के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत में जन्‍मी दूसरी महिला हैं

नई दिल्‍ली : कल्‍पना चावला के बाद अब भारत की एक और बेटी अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने वाली हैं। सिरीशा बांदला का ताल्‍लुक आंध्र प्रदेश से है और उनका जन्‍म भी यहीं हुआ। वह कल्‍पना चावला के बाद भारत में जन्‍मी दूसरी महिला हैं, जो अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने वाली हैं। वह वर्जिन गेलेक्टिक के 'VSS यूनिटी' से पांच अन्‍य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ रवाना होंगी।

कल्‍पना चावला का जन्‍म जहां हरियाणा के करनाल में हुआ था, वहीं सिरीशा बांदला का जन्‍म आंध्र प्रदेश के गुंटूर में हुआ था। वह अमेरिका के ह्यूस्टन में पली-बढ़ीं और अब अंतरिक्ष के सैर पर निकलने वाली हैं। उनकी इस उपलब्धि पर भारत में भी खुशी की लहर है। जिस ‘VSS Unity’ स्‍पेसक्राफ्ट से वह अंतरिक्ष जाने वाली हैं, वह 11 जुलाई को न्‍यू मेक्सिको से उड़ान भरेगी।

कम वक्‍त में बड़ी उपलब्धि

सिरीशा उन छह वैज्ञानिकों में से एक होंगी, जो इस अंतरिक्ष यान से उड़ान भरने वाले हैं। स‍िरीशा अंतरिक्षयात्रियों के इस समूह में चौथे नंबर की वैज्ञानिक हैं। वह वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी के गवर्नमेंट अफेयर्स एंड रिसर्च ऑपरेशंस में वाइस प्रेसीडेंट भी हैं और उन्‍होंने महज छह वर्षों में यह उपलब्धि हासिल की है। उन्‍होंने अमेरिका के पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिकल/एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग से ग्रैजुएशन किया और फिर जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री ली।

अपने अंतरिक्ष उड़ान के समय सिरिशा ह्यूमन टेंडेड रिसर्च एक्सपीरिएंस की इंचार्ज भी रहेंगी, जिससे उन्‍हें अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रोनॉट्स पर होने वाले असर के बारे में जानने का मौका मिलेगा। बचपन से ही अंतरिक्ष की दुनिया ने उन्‍हें आकर्षित किया और रॉकेट्स तथा स्पेसक्राफ्ट्स को देखकर होने वाले रोमांच ने उन्‍हें एस्ट्रोनॉट बनने के लिए प्रेरित किया। 

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