Gyanvapi Case : श्रृंगार गौरी केस में मुस्लिम पक्ष को झटका, 8 सप्ताह का समय देने से कोर्ट का इंकार, 29 को कार्बन डेटिंग पर सुनवाई

Shringar Gauri case : अदालत 29 सितंबर को कार्बन डेटिंग की मांग वाली हिंदू पक्ष की अर्जी पर सुनवाई शुरू करेगी। हिंदू पक्ष के पांच वादियों के बाद इस मामले में पक्ष बने 16 लोगों के नाम मामले से हटाने पर कोर्ट ने आपत्ति जताई है। 

Shringar Gauri case : Court rejectes Muslim side application for allowing 8 weeks time
वाराणसी की जिला अदालत में ज्ञानवापी केस की सुनवाई।  |  तस्वीर साभार: ANI
मुख्य बातें
  • वाराणसी जिला अदालत में समय देने की मांग वाली मुस्लिम पक्ष की अर्जी खारिज
  • श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई शुरू करने से पहले मुस्लिम पक्ष ने 8 सप्ताह का समय मांगा था
  • जिला अदालत में 29 सितंबर को हिंदू पक्ष की कार्बन डेटिंग की मांग पर होगी सुनवाई

Shringar Gauri case : ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। वाराणसी की जिला अदालत ने श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई शुरू करने से पहले आठ सप्ताह का वक्त देने की मांग वाली मुस्लिम पक्ष की अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष की कार्बन डेटिंग की मांग पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए मुस्लिम पक्ष को 29 सितंबर तक का समय दिया है। अदालत अब 29 सितंबर को कार्बन डेटिंग की मांग वाली हिंदू पक्ष की अर्जी पर सुनवाई शुरू करेगी। हिंदू पक्ष के पांच वादियों के बाद इस मामले में पक्ष बने 16 लोगों के नाम मामले से हटाने पर कोर्ट ने आपत्ति भी जताई है। 

12 सितंबर के अपने आदेश में वाराणसी की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता मस्जिद को मंदिर में "बदलने" के लिए नहीं कह रहे थे, बल्कि पूरे साल विवादित संपत्ति पर "पूजा" करने का अधिकार मांग रहे थे। 1991 में बने एक कानून के तहत, पूजा स्थलों को वैसे ही रहने दिया जाना चाहिए जैसे वे 15 अगस्त, 1947 को थे। बाबरी मस्जिद मामला अपवाद था। मुस्लिम याचिकाकर्ताओं द्वारा एक चुनौती, मुख्य रूप से मस्जिद प्रशासक, जो याचिका को खारिज करना चाहते थे, को न्यायाधीश ने खारिज कर दिया, जिन्होंने कहा कि याचिका में कोई योग्यता नहीं है।

सर्वे को मुस्लिम पक्ष ने दी चुनौती
हिंदू याचिकाकर्ताओं द्वारा विवादास्पद रूप से लीक की गई वीडियोग्राफी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मस्जिद परिसर के भीतर एक तालाब में "शिवलिंग" या भगवान शिव का अवशेष पाया गया था, जिसका इस्तेमाल मुस्लिम प्रार्थनाओं से पहले "वज़ू" या शुद्धिकरण अनुष्ठान के लिए किया जाता था। मस्जिद के अंदर फिल्मांकन को ज्ञानवापी मस्जिद समिति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसने कहा था कि यह कदम 1991 के कानून (पूजा के स्थान अधिनियम) का उल्लंघन करता है। मई में, सुप्रीम कोर्ट ने विवाद की "जटिलता और संवेदनशीलता" का जिक्र करते हुए शहर के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को मामला सौंपा, जिसमें कहा गया था कि इसे अनुभवी हैंडलिंग की आवश्यकता है।

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष की तरफ से कैविएट दाखिल, विस्तार से जानकारी

हाई कोर्ट में हिंदू पक्ष की कैवियट दाखिल
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा के अधिकार को लेकर आए जिला जज के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कैवियट दाखिल की गई। कैवियेट में मांग की गई कि अगर जिला जज के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोई रिवीजन याचिका दाखिल की जाती है तो हिंदू पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। 

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