तिहाड़ जेल में अलगाववादी नेता यासीन मलिक भूख हड़ताल पर, लगाया आरोप

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अलगाववादी नेता यासीन मलिक भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने अपने इस हड़ताल के पीछे निष्पक्ष जांच ना होना बताया है।

Yasin Malik, tihar jail, yasin malik hinger strike
तिहाड़ जेल में बंद हैं यासीन मलिक 
मुख्य बातें
  • तिहाड़ जेल में बंद हैं यासीन मलिक
  • अलग अलग मामलों में सुनाई गई है सजा
  • भूख हड़ताल पर हैं यासीन मलिक

अलगवावादी नेता यासीन मलिक अपने किए गुनाहों की सजा दिल्ली के तिहाड़ जेल में काट रहे हैं। लेकिन इस समय चर्चा में वो अपने भूख हड़ताल की वजह से हैं। उनका आरोप है कि उनके मामले की जांच सही तरह से नहीं की जा रही है। मलिक ने शुक्रवार सुबह तिहाड़ की जेल नंबर 7 में अपनी हड़ताल शुरू की और दावा किया कि उनके मामले की ठीक से जांच नहीं हो रही है। खबरों के मुताबिक, जेल के शीर्ष अधिकारियों ने मलिक से बात की और उन्हें हड़ताल खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

रुबिया सईद केस में जिरह का मामला
प्रतिबंधित जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक ने सीबीआई अदालत को बताया कि वह 1989 के रुबिया सईद अपहरण मामले में गवाहों से जिरह करना चाहते हैं अन्यथा वह इस महीने की शुरुआत में भूख हड़ताल पर चले जाएंगे। यह मामला जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के 8 दिसंबर 1989 को जेकेएलएफ द्वारा अपहरण से संबंधित है।

22 जुलाई तक दिया था समय
यासीन मलिक टेरर फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उन्हें 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज 2017 टेरर-फंडिंग मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।मलिक ने रुबिया सईद अपहरण मामले में गवाहों से खुद जिरह करने के अपने अनुरोध के बारे में अदालत को सूचित किया और कहा कि अगर सरकार उनकी याचिका को स्वीकार नहीं करती है तो वह भूख हड़ताल शुरू करने से नहीं हिचकिचाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि जेकेएलएफ प्रमुख ने अदालत से कहा कि वह 22 जुलाई तक सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे जिसके बाद वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

रुबिया सईद का 1989 में हुआ था अपहरण
उक्त मामला जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से संबंधित है, जिसे जेकेएलएफ द्वारा 8 दिसंबर, 1989 को अपहरण कर लिया गया था। 13 दिसंबर को तत्कालीन वीपी सिंह सरकार के बाद अपहरण के पांच दिन बाद उसे छोड़ दिया गया था। केंद्र ने रुबैया की आजादी के बदले पांच जेकेएलएफ आतंकवादियों को रिहा करने पर सहमति जताई। मामला, जो तब से ठंडा हो गया था, 2019 में एनआईए द्वारा मलिक की गिरफ्तारी के बाद पुनर्जीवित हो गया था।

Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।

Times Now Navbharat
Times now
zoom Live
ET Now
ET Now Swadesh
Live TV
अगली खबर