Sawal Public Ka: क्या जो इतिहास अभी तक हमने-आपने पढ़ा है वो कितना सच्चा है और कितना अधूरा?

Sawal Public Ka: इतिहास पर राजनीति हो रही है लेकिन सवाल तो अभी भी बना हुआ है कि क्या जो इतिहास अभी तक हमने-आपने पढ़ा है वो कितना सच्चा है और कितना अधूरा। टाइम्स नाउ नवभारत ने कुछ इतिहासकारों से बात कर ये जानने की कोशिश की क्या इतिहास को बदलने का ये सही वक्त है?

Sawal Public Ka Is the history that we have read so far, how true and how incomplete?
इतिहास की किताब में सिर्फ मुगलों का बखान? 

Sawal Public Ka: पिछले कुछ महीने से देश में इतिहास को लेकर नई बहस छिड़ी है। कभी कहा जाता है कि इतिहास में मुगलों राजाओं को ज्यादा तरजीह मिली...तो कभी कहा जाता है कि इतिहास में कई हिंदू शासकों को भुला दिया गया । विवादों के बीच जेडीयू ने साफ कर दिया है कि इतिहास में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। जेडीयू की ओर से आया ये बयान बीजेपी की सोच बिल्कुल अलग है। इतिहास पर राजनीति अपनी जगह है लेकिन सवाल तो अभी भी बना हुआ है कि क्या जो इतिहास अभी तक हमने-आपने पढ़ा है वो कितना सच्चा है और कितना अधूरा। टाइम्स नाउ नवभारत ने कुछ इतिहासकारों से बात कर ये जानने की कोशिश की क्या इतिहास को बदलने का ये सही वक्त है?

इतिहास दोबारा लिखने को लेकर विवाद एक बार फिर की चिंगारी उड़ी है और इस बार चिंगारी की वजह है NCERT की किताब। NCERT ने 12वीं के सिलेबस से गुजरात दंगों से जुड़ा चैप्टर किताब से हटा दिया है। 12वीं के राजनीति विज्ञान की किताब का अंतिम चैप्टर गुजरात दंगों पर था। NCERT ने सिलेबस में गुजरात दंगों से जुड़े चैप्टर हटाने के पीछे तर्क दिया है कि ये अब अप्रासंगिक है। 

जिस तरह से चैप्टर में बदलाव हो रहे हैं ठीक वैसे ही अब प्राचीन इतिहास के पन्नों और तथ्यों को बदलने की भी मांग  उठने लगी है। बीजेपी दावा करती है कि इतिहास में जितना मुगलों के बारे में लिखा गया है। उतना हिंदू राजाओं और सम्राटों के बारे में नहीं लिखा गया। खुद गृह मंत्री अमित शाह ये बात मानते हैं और इतिहास बदलने की वकालत भी कर चुके हैं, हालांकि NDA की सहयोगी जेडीयू को लगता है कि इतिहास बदलने की कोई जरुरत नहीं है। इतिहास इतिहास है और ये बदला या दोबारा नहीं लिखा जा सकता। जो घटनाएं घट गईं अच्छी या बुरी, उन्हें बदला नहीं जा सकता।

ये दूसरा मौका है जब जेडीयू की ओर से इतिहास में बदलाव को लेकर ऐसी प्रतिक्रिया आई है, जो बीजेपी के बिल्कुल उलट है। कुछ दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इतिहास बदलने पर इशारों ही इशारों में बीजेपी पर चुटकी ली थी। तब नीतीश कुमार ने कहा था कि मुझे समझ नहीं आता है कि कोई इसे कैसे बदल सकता है। भाषा एक अलग मुद्दा है, लेक‍िन आप मौल‍िक इतिहास को नहीं बदल सकते हैं।

जेडीयू NDA की सबसे बड़ी सहयोगी है और उसी की तरफ से इतिहास में किसी तरह के बदलाव को लेकर रेड सिग्नल है । ऐसे में सवाल है कि क्या भविष्य में अगर इतिहास में बदलाव होता है तब भी जेडीयू का यही रूख रहेगा । 

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