सायरा बानो BJP में हुईं शामिल, चुनाव लड़ने के कयास, तीन तलाक के खिलाफ गईं थीं सुप्रीम कोर्ट

देश
रवि वैश्य
Updated Oct 11, 2020 | 08:57 IST

तीन तलाक के खिलाफ जंग लड़ने वाली सायरा बानो ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है, सायरा ने ही सबसे पहले तीन तलाक (Triple Talaq) के खिलाफ अवाज उठाई थी।

SAIRA BANO TRIPLE TALAQ
सायरा बानो ने ही पहली बार Triple Talaq और निकाह हलाला पर बैन लगाने की मांग की थी 

मुख्य बातें

  • सायरा बानो भारतीय जनता पार्टी  में शामिल हो गई हैं
  • सायरा बानो ने ही सुप्रीम कोर्ट में सबसे पहली याचिका दायर की थी
  • केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ कानून लेकर आई

तीन तलाक  (Triple Talaq) के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली सायरा बानो (Saira Bano) भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गई हैं, तीन तलाक को आपराधिक बनाने की मांग को लेकर सायरा बानो ने ही सुप्रीम कोर्ट में सबसे पहली याचिका दायर की थी, गौरतलब है कि सायरा बानो देश की पहली मुस्लिम महिला हैं जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और 23 फरवरी 2016 को  सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर की थी।

बाद में लंबी लड़ाई के बाद इस कानूनी लड़ाई में उन्हें बड़ी कामयाबी मिली थी बता दें कि  तीन तलाक के साथ ही निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती भी सायरा ने दी थी।

इस याचिका में उन्होंने मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह (Polygamy) को भी गलत करार देते हुए इसे खत्म करने की मांग उठाई थी बाद में केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ कानून भी लेकर आई और आज देश में मुस्लिम महिलाओं को इससे क्या हासिल हुआ है ये किसी से छिपा नहीं है।

उनके बीजेपी में आने की अटकलें काफी समय से थीं, सायरा  उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में रहती हैं, सायरा को उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत की मौजदूगी में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करवाई गई, सायरा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की नीतियों से प्रेरित होकर वो पार्टी में शामिल हुईं हैं।

क्या था सायरा बानो का मामला 

सायरा की शादी 2002 में इलाहाबाद के एक प्रॉपर्टी डीलर से हुई थी,सायरा का आरोप था कि शादी के बाद उन्हें हर दिन पीटा जाता था उसके पति ने उन्हें टेलीग्राम के जरिए तलाकनामा भेजा था वे एक मुफ्ती के पास गईं तो उन्होंने कहा कि टेलीग्राम से भेजा गया तलाक जायज है, इसके बाद सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला के रिवाज को भी चुनौती दी थी इसके तहत मुस्लिम महिलाओं को अपने पहले पति के साथ रहने के लिए दूसरे शख्स से दोबारा शादी करनी होती है। 

तीन तलाक कानून में कई प्रावधान किए गए हैं

भारतीय संसद के दोनों सदनों ने मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 पारित किया था,पिछले साल 30 जुलाई को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद तीन तलाक कानून अस्तित्व में आया था।

मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तीन बार तलाक, तलाक, तलाक बोलना अपराध माना गया है। लिखित, मेल, एसएमएस, वॉट्सऐप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक चैट के माध्यम से तीन तलाक देना अब गैरकानूनी है, इस कानून के तहत दर्ज मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन साल तक सजा का प्रावधान है।


 

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