जम्मू-कश्मीर : राम माधव बोले-नेताओं की हुई है रिहाई, ब्रॉडबैंड सेवा भी होगी बहाल

देश
Updated Dec 26, 2019 | 19:18 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Ram Madhav on Jammu and Kashmir : भाजपा के महासचिव राम माधव ने गुरुवार को कहा कि घाटी में नजरबंद नेताओं की रिहाई हुई है और ब्रॉडबैंड सेवा को बहाल करने की प्रक्रिया चल रही है।

Ram Madhav says people released from house arrest Broadband services are being restored in J&K, जम्मू-कश्मीर : राम माधव बोले-नेताओं की हुई है रिहाई, ब्रॉडबैंड सेवा भी होगी बहाल
राम माधव ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर दिया बयान।  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • जम्मू-कश्मीर में नेताओं की नजरबंदी पर बोले भाजपा महासचिव राम माधव
  • भाजपा नेता ने कहा कि नजरबंद नेताओं की हो रही रिहाई, ब्रॉडबैंड सेवा भी होगी बहाल
  • गत पांच अगस्त के बाद घाटी में संचार व्यवस्था पर लगाई गई रोक, अब हो रही बहाली

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने गुरुवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में कई लोगों को नजरबंदी एवं हिरासत से रिहा किया गया है और यह लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा स्थितियों का आंकलन करने के बाद राज्य का प्रसासन समय-समय पर उचित कदम उठाता है। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य में ब्रॉडबैंड सेवाओं को बहाल किया जा रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवा भी चालू की जाएगी।

बता दें कि गत पांच अगस्त से जम्मू-कश्मीर को कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। राज्य में अनुच्छेद 370 समाप्त करने के अपने फैसले के मद्देनजर केंद्र सरकार ने यहां संचार व्यवस्था पर रोक लगा दी थी लेकिन घाटी में स्थितियां जैसे-जैसे सामान्य हुईं वैसे-वैसे प्रतिबंधों में ढील दी गई। पहले लैंड लाइन चालू किया गया और फिर पोस्ट पेड मोबाइल फोन की बहाली की गई। 

सरकार को आशंका थी कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी के स्थानीय एवं अलगाववादी नेता वहां का माहौल खराब कर सकते हैं। इस आशंका पर सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित बड़ी संख्या में अलगाववादी नेताओं को नजरबंद कर दिया। 

इस बीच, विपक्ष के नेताओं ने नेशनल कांफ्रेस के नेता फारूक अब्दुल्ला को रिहा करने की मांग भी सरकार से की लेकिन सरकार ने कहा कि रिहाई का फैसला स्थानीय प्रशासन सुरक्षा को ध्यान में रखकर करेगा। गौरतलब है कि भारत सरकार ने गत पांच अगस्त के अपने ऐतिहासिक फैसले में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा से युक्त केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया है जबकि लद्दाख की अपनी विधानसभा नहीं होगी। 

गृह मंत्री अमित शाह ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 को पांच अगस्त को राज्यसभा में पेश किया। उच्च सदन में इस विधेयक को उसी दिन पारित कर दिया गया जबकि यह विधेयक छह अगस्त को लोकसभा से पारित हुआ। इस विधेयक पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नौ अगस्त को हस्ताक्षर किए। 31 अक्टूबर 2019 से दोनों केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ गए।

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