अदनान सामी, वाटरप्रूफ घड़ी जैसे उदाहरण देकर राम माधव ने किया नागरिकता कानून का बचाव

देश
Updated Dec 31, 2019 | 09:06 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Ram Madhav on CAA : बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा है कि विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण देश के कई हिस्सों में हिंसा हुई। विरोधी नेता नागरिकता संशोधन अधिनियम को समझना नहीं चाहते।

Ram Madhav
BJP के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव 

बंगलुरु : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा है कि देशभर में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन में 'निर्दोष' और 'गुनहगार' दोनों ही लोगों की मौत हुई है। माधव बंगलुरु में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

माधव ने कहा, 'विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण देश के कई हिस्सों में हिंसा और अशांति हुई और बेकसूर और गुनहगार दोनों लोगों की जान गई।'

उन्होंने कहा कि यह अधिनियम किसी को बाहर करने के लिए नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वालों को नागरिकता देने के लिए है। भाजपा मुस्लिमों को नागरिकता देने के खिलाफ नहीं है, अगर ऐसा होता तो हम गायक अदनान सामी को नागरिकता नहीं देते जो पाकिस्तान से हैं।

बीजेपी महासचिव ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध करने वाले नेताओं के दिमाग 'ज्ञान और सूचना प्रूफ' हैं। हमारे स्कूल के दिनों में वाटरप्रूफ घड़ी का फैशन था। यह घड़ी का प्रकार है जिसमें पानी नहीं जा सकता है। इसी तरह सीएए का विरोध कर रहे विपक्षी नेताओं का दिमाग नॉलेज प्रूफ और इंफॉरमेशन प्रूफ है। 

वहीं हरियाणा के कुरूक्षेत्र से भाजपा सांसद और पूर्व मंत्री नायब सिंह सैनी ने राहुल गांधी को सबसे बड़ा मूर्ख बताया और कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष को नहीं मालूम है कि संशोधित नागरिकता कानून क्या है। उन्होंने कहा, 'अगर हम कहें कि मूर्खों में सब से बड़ा अगर कोई मूर्ख है तो मुझे लगता है कि राहुल गांधी है। क्योंकि राहुल गांधी को यही मालूम नहीं है कि सीएए क्या है, किसके लिए है। राहुल गांधी नहीं समझते हैं कि वह किस चीज का विरोध कर रहे हैं।' उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस इस कानून पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
सैनी के साथ कैथल विधायक लीला राम गुर्जर भी थे।

नया कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिंदुओं, सिखों, जैनियों, पारसियों, बौद्धों और ईसाइयों को नागरिकता देता है, जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आए थे।

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