सावरकर ने अंग्रेजों के समक्ष दायर की थी दया याचिका? राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा तर्क, किया महात्मा गांधी का जिक्र

राजनाथ सिंह ने कहा कि सावरकर के बारे में झूठ फैलाया गया। बार-बार कहा गया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार के समक्ष दया याचिका दायर कर जेल से रिहा करने की मांग की। महात्मा गांधी ने उनसे दया याचिका दायर करने के लिए कहा था।

rajnath singh
राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री 

मुख्य बातें

  • मुझे प्रसन्नता है पिछले कुछ वर्षों मे वीर सावरकर के जीवन पर कुछ लोगों ने बहुत मेहनत से शोध किया: राजनाथ सिंह
  • ईमानदार विश्लेषण का नतीजा है कि आज वीर सावरकर के जीवन पर कुछ अच्छी और शोधपरक किताबें उपलब्ध हो पाई हैं: रक्षा मंत्री

नई दिल्ली: हिंदुत्व के प्रतीक वीर सावरकर के लिए बार-बार कहा जाता है कि उन्होंने जेल से रिहा होने के लिए अंग्रेजों के सामने दया याचिका दायर की थी। इस पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के सुझाव पर अंडमान जेल में कैद के दौरान वीर सावरकर ने अंग्रेजों के सामने दया याचिका दायर की। लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को कुछ विचारधारा का पालन करने वालों ने बदनाम किया और इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सिंह ने यह बात अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में सावरकर पर एक पुस्तक के विमोचन के दौरान कही, जहां आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सभा को संबोधित किया। भागवत ने कहा कि सावरकर को गलत समझा गया क्योंकि उन्होंने सख्ती से बात की लेकिन तर्क दिया कि अगर पूरे भारत ने उनकी तरह बात की होती, तो देश को विभाजन का सामना नहीं करना पड़ता। वह इस विचार से भी सहमत थे कि सड़कों का नाम मुगल बादशाह औरंगजेब जैसी शख्सियतों के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए। पुस्तक- वीर सावरकर: द मैन हू कैन्ड प्रिवेंटेड पार्टिशन- उदय माहूरकर और चिरायु पंडित द्वारा लिखी गई है और रूपा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। 

महात्मा गांधी ने सावरकर जी को रिहा करने की अपील की थी: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने कहा कि सावरकर के खिलाफ बहुत झूठ फैलाया गया। यह बार-बार कहा गया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार के समक्ष कई दया याचिकाएं दायर कीं। सच तो यह है कि उन्होंने अपनी रिहाई के लिए ये याचिकाएं दायर नहीं कीं। आम तौर पर एक कैदी को दया याचिका दायर करने का अधिकार होता है। महात्मा गांधी ने कहा था कि आप दया याचिका दायर करें। गांधी के सुझाव पर ही उन्होंने दया याचिका दायर की थी। और महात्मा गांधी ने सावरकर जी को रिहा करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह हम शांति से आजादी के लिए आंदोलन चला रहे हैं, वैसा ही सावरकर करेंगे।

'सावरकर के योगदान की अनदेखी की गई'

उन्होंने कहा कि सावरकर ने वास्तव में लोगों को गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए प्रेरित किया और महिलाओं के अधिकारों सहित कई अन्य सामाजिक मुद्दों के बीच छुआछूत के खिलाफ आंदोलन किया। हालांकि, देश की सांस्कृतिक एकता में उनके योगदान की अनदेखी की गई। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उनके लिए नफरत ऐसी थी कि जब 2003 में सावरकर की एक तस्वीर संसद में रखी जा रही थी, तो अधिकांश राजनीतिक दलों ने बहिष्कार किया, जबकि सरकार बदलने पर अंडमान और निकोबार जेल में उनके नाम की एक पट्टिका हटा दी गई।

सावरकर एक विचार थे: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि नाजी या फासीवादी के रूप में सावरकर की आलोचना भी सही नहीं। सच्चाई यह है कि वह हिंदुत्व में विश्वास करते थे, लेकिन वह वास्तव में एक यथार्थवादी थे। उनका मानना ​​था कि एकता के लिए संस्कृति की एकरूपता महत्वपूर्ण है। सावरकर एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार थे और उनके अनुयायी दिन पर दिन बढ़ रहे हैं। 

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