Punjab Congress में जारी है कलह! सिद्धू के साथ अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने भी कैप्टन को लिया निशाने पर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 13, 2021, 06:42 AM IST

Punjab Congress Crisis: पंजाब कांग्रेस में जारी घमासान फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है। सिद्धू के साथ-साथ अब पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शमशेर सिंह दूलो ने भी कैप्टन सरकार पर सवाल उठाए हैं।

Punjab Congress में जारी है कलह! सिद्धू के साथ अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने भी कैप्टन को लिया निशाने पर
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चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस  (Punjab Congress) में जारी खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को निशाने पर लेने वाले प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बाद अब  चुनाव से पहले कांग्रेस में एक और नेता ने कैप्टन सरकार पर सवाल उठाए हैं। पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शमशेर सिंह दूलो ने सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दलित विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति घोटाले के दोषियों और जहरीली शराब से हुई मौतों के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।  

कैप्टन सरकार विफल- दूलो

शमशेर सिंह दूलो यहीं नहीं रुके उन्होंने दावा किया कि अमरिंदर सरकार न तो रेत खनन माफियाओं पर नकेल कसी पाई और न ही पंजाब में नशे के काले कारोबार पर लगाम लगा पाई है। सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए दूलो ने कहा कि यदि जहरीली शराब से 126 लोगों की जान लेने वालों पर कार्रवाई नहीं की या 15 दिनों मे एक्शन ना लिया तो वह मुख्यमंत्री के घर के बाहर रोष-प्रदर्शन करेंगे।

दूलो ने कहा, 'आतंकवाद के खिलाफ बहादुरी से लड़ने वाले कांग्रेस के टकसाली कार्यकर्ता आज ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस पर दलबदलुओं का कब्जा हो गया है।' दूलो ने कहा कि हिंदुओं, दलितों और पिछड़े वर्गों की अनदेखी का खामियाजा पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

सिद्धू ने फिर घेरा

वहीं पंजाब में किसानों के बहाने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह को घेरने की कोशिश की है। सिद्धू ने अमरिंदर सिंह सरकार से मांग की है कि निगमों के जरिये तिलहन और दलहन की फसलों की खरीद की जाए। इसके अलावा सिद्धू ने कहा है कि किसान संगठन के आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं के बाद किसानों के खिलाफ जो केस दर्ज किए गए थे उन्हें भी वापस लिया जाना चाहिए। सिद्धू ने इस संबंध में एक चिट्ठी भी लिखी है।

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