Protest in PoK : पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन, विधानसभा चुनाव में धांधली के आरोप

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 27, 2021, 08:25 AM IST

Protests against Pakistan in PoK : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगे। पीओके प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर ने विधानसभा चुनाव में धांधली के आरोप लगाए।

Protest in PoK : पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन, विधानसभा चुनाव में धांधली के आरोप

कोटली : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर विधानसभा चुनाव में चुनावी धांधली की खबरों के बीच पीओके में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भारी प्रदर्शन किया गया। पाकिस्तान सेना के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए क्योंकि कई रिपोर्टें सामने आईं कि इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने पीओके की चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। यह चुनाव 25 जुलाई को आयोजित किया गया था।

इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने 25 सीटें जीतीं, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने 11 और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) को 6 सीटें मिलीं। पीओके विधानसभा में कुल 53 सदस्य हैं, हालांकि, केवल 45 ही सीधे चुने जाते हैं। 

पीओके के प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर ने कहा कि विधानसभा चुनाव और कुछ नहीं बल्कि लोगों को गुमराह करने का एक दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल इमरान खान सरकार के साथ हैं और उन्होंने कहा कि पीओके में चुनावी प्रक्रिया सिर्फ तमाशा है।

हालांकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज ने पीओके विधानसभा चुनाव परिणाम को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावों में धांधली की गई और चुनाव के परिणामों को खारिज कर दिया।

भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की थी और कहा था कि 'सैन्य कब्जे वाले क्षेत्र की स्थिति को बदलने के लिए किसी भी कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं है।

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा था कि हमने 15 नवंबर, 2020 को होने वाले तथाकथित "गिलगित-बाल्टिस्तान" विधान सभा के चुनावों की घोषणा के संबंध में रिपोर्ट देखी है। भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से सामने अपना कड़ा विरोध व्यक्त किया है और दोहराया है कि पूरे यूनियन टेरिटेरी तथाकथित गिलगित और बाल्टिस्तान के क्षेत्रों समेत जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्र 1947 में इसके परिग्रहण के आधार पर भारत का एक अभिन्न अंग हैं। पाकिस्तान सरकार का अवैध रूप से और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है। 

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