राष्ट्रपति चुनाव : BJP की मुश्किलें बढ़ाएंगे केसीआर, विपक्ष को लामबंद करने में जुटे 

देश
अमित कुमार
अमित कुमार | DEPUTY NEWS EDITOR
Updated Jun 10, 2022 | 18:02 IST

Presidential election 2022: इस महीने केसीआर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मिलने कोलकाता तथा बिहार के सीएम नीतीश कुमार व विपक्ष के नेता तेजस्वी से मिलने के लिए पटना जाने की तैयारी कर रहे हैं। तेजस्वी, केसीआर से हैदराबाद में मिल चुके हैं।

Presidential election: KCR to increase troubles of BJP, busy in uniting opposition
2024 के आम चुनाव से पहले भाजपा को विपक्ष की ताकत का एहसास कराना चाहते हैं केसीआर।   |  तस्वीर साभार: PTI

नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने देश के 16वें राष्ट्रपति के चुनाव का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान होते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास ये चुनाव जीतने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं है। टीआरएस प्रमुख और तेंलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव जिस तरह क्षेत्रीय दलों की लामबंदी कर रहे हैं उससे बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

आदिवासी या मुस्लिम चेहरा उतार सकती है BJP
केसीआर की कोशिश है कि 2024 के आम चुनाव से पहले ही बीजेपी को घेर लिया जाए और अहसास करा दिया जाए की आगे की राह आसान नहीं है। अभी तक न तो एनडीए और न ही यूपीए ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। अलबत्ता सूत्रों के हवाले से जो खबरें आ रही हैं उसमें एनडीए की तरफ से आदिवासी से लेकर मुस्लिम चेहरे को उतारने की बात की जा रही है। वहीं कांग्रेस की तरफ से गुलाम नबी आजाद को उतारने की बात आ रही है, लेकिन माना जा रहा है कि इस चुनाव में विपक्ष के असली सूत्रधार केसीआर बनेंगे। 

2024 से पहले BJP को चुनौती देना चाहते हैं केसीआर
 2017 के चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के मुकाबले कांग्रेस ने मीरा कुमार को उतारा था और वह बुरी तरह हारी थीं। तब केसीआर की पार्टी टीआरएस एनडीए उम्मीदवार के साथ थी। टीआरएस के अलावा एआईडीएमके, वाईएसआरसीपी, बीजेडी व तेलुगु देशम पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन किया था। इस बार टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव एनडीए से दो-दो हाथ करने के लिए जबरदस्त प्रयास कर रहे हैं। केसीआर का मकसद 2024 में बीजेपी के नेनृत्व वाले एनडीए को चुनौती देना है। इसके लिए वह देश भर में घूम रहे हैं और अभी तक पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, एनसीपी चीफ शरद पवार, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान, सपा प्रमुख व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव समेत कई बड़े नेताओं से मिल चुके हैं और कई नेताओं से अभी मिलने वाले हैं।

विपक्ष के कई नेताओं से कर चुके हैं मुलाकात
इस महीने केसीआर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मिलने कोलकाता तथा बिहार के सीएम नीतीश कुमार व विपक्ष के नेता तेजस्वी से मिलने के लिए पटना जाने की तैयारी कर रहे हैं। तेजस्वी, केसीआर से हैदराबाद में मिल चुके हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने हैदराबाद में केसीआर से मुलाकात की थी। हालांकि कांग्रेस और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी से फिलहाल दूरी है। समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों से मिलकर एकजुटता लाने की कोशिश में लगे केसीआर ने कांग्रेस तक पहुंचने का कोई प्रयास नहीं किया है। तेलंगाना राष्ट्र समिति के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि कांग्रेस उस उम्मीदवार का समर्थन करने का विकल्प चुन सकती है, जिस पर भाजपा उम्मीदवार को चुनौती देने के लिए अन्य दलों ने सहमति दी हो।

पटनायक, जगनमोहन को साधने में जुटी BJP
ऐसे में भाजपा का पूरा गणित ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी पर टिका है। दोनों में से कोई भी समर्थन कर देता है, तो भाजपा उम्मीदवार के लिए राष्ट्रपति पद की राह आसान हो जाएगी। बताते हैं कि ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक को साधने का जिम्मा रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव और आंध्र प्रदेश के सीएम से संपर्क साधने के लिए जीवीएल नरसिम्हा को लगाया गया है। इस सियासी हलचल में बिहार के सीएम नीतीश कुमार हॉटकेक बन गये हैं, भूपेंद्र यादव ने बिहार में जो राजनीति की उससे खफा नीतीश कुमार लालू परिवार से पींगें बढ़ाने लगे थे और जातीय जनगणना समेत कई मुद्दों पर सक्रिय हो गये थे। स्थिति की नजाकत को भांपकर भाजपा ने धर्मेंद्र प्रधान को भेजकर नीतीश कुमार को संदेश दिलाया कि वह चाहें तो 2025 तक सीएम रहें या उप राष्ट्रपति पद स्वीकार करें। उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनका सीएम पद सुरक्षित है। इतना ही नहीं जातीय जनगणना का विरोध करने वाली भाजपा ने बिहार में नीतीश के दबाव में ही समर्थन किया।

अहम होगा नीतीश कुमार का रुख
नीतीश कुमार पलटवार बहुत जबरदस्त करते हैं और आरजेडी से नजदीकी बढ़ाकर उन्होंने साफ संदश दे दिया था कि विकल्प उनके पास भी है। यूं भी 2012 में एनडीए में रहते हुए नीतीश कुमार ने यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन दिया था जबकि 2017 के चुनाव में महागठबंधन में रहते हुए नीतीश कुमार ने रामनाथ कोविंद को समर्थन देने में देर नहीं लगाई क्योंकि जिस समय वह राष्ट्रपति उम्मीदवार बने थे उस समय वह बिहार के राज्यपाल थे। केसीआर उस नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को साधने के लिए बिहार पहुंचने वाले हैं। वह ऐसा सियासी चक्रव्यूह बना रहे हैं जिसमें बीजेपी घिर जाए और उसका मनोबल गिरे ताकि 2024 में उसे जमीन दिखाई जा सके।

 21 जुलाई को नए राष्ट्रपति के नाम की होगी घोषणा  
बता दें कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग होने के कारण इस चुनाव में एक सांसद के वोट का मूल्य 700 है। चुनाव आयोग के मुताबिक राष्ट्रपति चुनने के लिए लोकसभा में 543 और राज्यसभा में 233 और राज्यों के कुल 4 हजार 33 विधायक राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डालेंगे। इस तरह से राष्ट्रपति चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 4 हजार 809 होगी, इस तरह सासंदों के वोट की वैल्यू 543200 है जबकि विधायकों के वोट की वैल्यू 543231 है, यानी कुल वैल्यू 1086431 है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 18 जुलाई को वोटिंग होगी और 21 जुलाई को परिणाम आएगा। 24 जुलाई को मौजूदा राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल खत्म हो रहा है। चुनाव की अधिसूचना 15 जून को ही जारी हो जाएगी।

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