सपा विधायक ने बढ़ती आबादी का ठीकरा दलितों और आदिवासियों पर फोड़ा, कहा- मुसलमान नहीं जिम्मेदार 

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 27, 2021, 11:11 PM IST

विधायक इकबाल महमूद ने कहा कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिये एक कानून लाने पर विचार कर रही है।

सपा विधायक ने बढ़ती आबादी का ठीकरा दलितों और आदिवासियों पर फोड़ा, कहा- मुसलमान नहीं जिम्मेदार 

सम्भल: समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक इकबाल महमूद ने उत्तर प्रदेश के विधि आयोग द्वारा जनसंख्या नियंत्रण संबंधी मसौदा तैयार किए जाने को लेकर विवादित बयान देते हुए रविवार को आरोप लगाया कि यह कानून की आड़ में मुसलमानों पर वार करने की साजिश है और मुस्लिमों नहीं, बल्कि दलितों और आदिवासियों की वजह से आबादी बढ़ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया, ''दरअसल यह जनसंख्या की आड़ में मुसलमानों पर वार है। भाजपा के लोग अगर समझते हैं कि देश में सिर्फ मुसलमानों की तादाद बढ़ रही है तो यह कानून संसद के अंदर आना चाहिए था ताकि यह पूरे देश में लागू होता। यह उत्तर प्रदेश में ही क्यों लाया जा रहा है?'' सम्‍भल सीट से सपा विधायक ने कहा ''सबसे ज्यादा आबादी दलितों और आदिवासियों के यहां बढ़ रही है, मुसलमानों के यहां नहीं। मुसलमान तो अब समझ गये हैं कि दो-तीन बच्चों से ज्यादा नहीं होने चाहिए।''

"इस कानून का नतीजा भी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) जैसा ही होगा"

उन्होंने कहा कि इस कानून का नतीजा भी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) जैसा ही होगा। इसी तरह, असम में एनआरसी का असर मुसलमानों पर कम और गैर मुस्लिमों पर ज्यादा पड़ा। विधायक ने कहा कि जनसंख्या कानून का भी यही हश्र होगा। यह समझ में नहीं आता कि योगी सरकार का महज सात महीने का कार्यकाल बचा है, ऐसे में जनसंख्या कानून पर बात क्यों की जा रही है?

यह मसौदा दो महीने के अंदर तैयार करके राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की बढ़ती आबादी पर अंकुश लगाने के लिये राज्य का विधि आयोग एक कानून के मसौदे पर विचार कर रहा है। आयोग के अध्यक्ष आदित्य नाथ मित्तल के मुताबिक, राज्य की जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगाने के लिये आयोग ने कानून के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है। यह मसौदा दो महीने के अंदर तैयार करके राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव के दायरे में बहुविवाह तथा अन्य विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए विचार किया जा रहा है। यह आयोग की तरफ से महज सुझाव होंगे। यह सरकार पर है कि वह इन्हें मानती है या नहीं।

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