धर्मांतरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- दो बालिगों को एक साथ रहने का अधिकार छीना नहीं जा सकता

देश
आईएएनएस
Updated Nov 24, 2020 | 14:50 IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने ही पिछले फैसले को रद्द करते हुए कहा कि एक साथ रहने के लिए दो बालिगों के अधिकार को किसी के द्वारा छीना नहीं जा सकता। 

On conversion, Allahabad High Court said - right of two adults to live together cannot be taken away
धर्म परिवर्तन पर इलाहाबाद हाई कोर्ट 

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पिछले फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें उसने 'सिर्फ शादी के उद्देश्य से' धर्म परिवर्तन को अस्वीकार्य माना था। अदालत ने कहा कि अनिवार्य रूप से यह मायने नहीं रखता कि कोई धर्मातरण वैध है या नहीं। एक साथ रहने के लिए दो बालिगों के अधिकार को राज्य या अन्य द्वारा नहीं छीना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यक्ति की पसंद की अवहेलना करना जो बालिग उम्र का है, न केवल एक बालिग व्यक्ति की पसंद की स्वतंत्रता के लिए विरोधी होगा, बल्कि विविधता में एकता की अवधारणा के लिए भी खतरा होगा।

कोर्ट ने कहा, जाति, पंथ या धर्म से परे एक साथी चुनने का अधिकार, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए संवैधानिक अधिकार के लिए स्वभाविक है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के उद्देश्य के लिए धर्मातरण पर आपत्ति जताने वाले दो पिछले फैसले उचित नहीं थे। दो-जजों की बैंच द्वारा निर्णय 11 नवंबर को दिया गया था लेकिन सोमवार को सार्वजनिक किया गया।

निर्णय अब उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एक कानूनी समस्या पैदा कर सकता है, जो कि दो पूर्व फैसलों के आधार पर अल-अलग धर्म के बीच संबंधों को रेगुलेट करने के लिए एक कानून की योजना बना रही है।

जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस विवेक अग्रवाल की बैंच ने एक मुस्लिम व्यक्ति और उसकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई की, जिसने हिंदू धर्म से इस्लाम अपना लिया था। याचिका महिला के पिता द्वारा उनके खिलाफ पुलिस शिकायत को खारिज करने के लिए दायर की गई थी।

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