Odd-Even Rule: दिल्ली में ऑड-ईवन बैक, अरविंद केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला

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Updated Sep 13, 2019 | 13:04 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Odd-Even Rule in Delhi: दिल्ली सरकार ने 4 नवंबर से 15 नवंबर के बीच ऑड ईवन प्लान को लागू करने का फैसला किया है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाएगी।

arvind kejriwal
दिल्ली के सीएम हैं अरविंद केजरीवाल 

नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल(arvind kejriwal) सरकार ने प्रदूषण(pollution) की समस्या का सामना करने के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि दीपावली के बाद चार नवंबर से 15 नवंबर के बीच ऑड- ईवन प्लान( Odd- Even Plan) को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी की घोषणा बाद में की जाएगी। इसके साथ ही प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए और कई अहम फैसले किए जाएंगे। 

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ऑड ईवन प्लान तय तिथियों में ही लागू रहेगा। इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा क्योंकि कि कई तरह की व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार ने यह फैसला दिवाली के बाद प्रदूषण के हालात से निपटने के लिए किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें भी दौड़ेंगी। सरकार यह कोशिश कर रही है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को इतना पुख्ता बनाया जाए ताकि लोग व्यक्तिगत कारों का इस्तेमाल कम से कम करें। 

प्रदूषण का सामना करने के लिए सात योजनाओं का किया ऐलान

  1. ऑड-ईवन 
  2. प्रदूषण मुक्त दिवाली
  3. प्रदूषण मुक्त मॉस्क का वितरण
  4. कूड़ा और पराली जलाने पर रोक
  5. धूल से निपटने के लिए योजना
  6. वृक्षारोपण पर खास ध्यान
  7. हॉट स्पॉट एक्शन प्लान

यहां जानें ऑड- ईवन का मतलब
दिल्ली सरकार की योजना के मुताबित चार नवंबर से 15 नवंबर के बीच ऑड-ईवन योजना लागू होगी। इसका अर्थ ये है कि 4, 6, 8, 10 , 12 और 14 नवंबर को वो गाड़ियां सड़कों पर उतरेंगी जिनके नबंर प्लेट का आखिरी अंक 0, 2, 4,6 और 8 हो। इसके अलावा 5, 7, 9, 11, 13 और 15 नवंबर को वो गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगी जिनके नंबर प्लेट का आखिरी अंक 1, 3, 5, 7 और 9 होगा। 

बता दें कि 2016 में दिल्ली में आप सरकार ने ऑड इवन स्कीम को लागू किया था। बाद में इसे कई चक्र में बढ़ाया गया। बताया जाता है कि इससे तात्कालिक राहत यह मिली थी कि दिल्ली की सड़कों पर कंजेशन की समस्या कम हुई। लेकिन प्रदूषण के स्तर में कोई खास असर नहीं दिखा। इसे देखते हुए बीजेपी और दूसरे विपक्षी दलों ने आप सरकार की घेरेबंदी करते हुए कहा था कि यह एक तुगलकी फरमान है जिसके जरिए आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। 

 

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