कुख्यात अपराधी अतीक अहमद पत्नी समेत AIMIM में शामिल, असदुद्दीन ओवैसी ने शान में पढ़े कसीदे

एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कुख्यात अपराधी अतीक अहमद को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है और उसके शान में कसीदे पढ़े

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कुख्यात अपराधी अतीक अहमद पत्नी समेत AIMIM में शामिल, असदु्ुदीन ओवैसी ने शान में पढ़े कसीद 

मुख्य बातें

  • कुख्यात अपराधी अतीक और उसकी पत्नी एआईएमआईएम में शामिल
  • अयोध्या के रुदौली में असदुद्दीन ओवैसी ने की घोषणा
  • ओवैसी बोले, जो लोग क्रिमिनल रिकॉर्ड की बातें करते हैं, पहले खुद को देखें

अयोध्या के रुदौली में एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि आपराधिक मामलों को लेकर दोहरा मानदंड नहीं चल सकता है और इसके साथ ही उन्होंने कुख्यात अपराधी अतीक अहमद को पार्टी में शामिल किया है। बता दें कि मौजूदा समय में अतीक अहमद जेल में बंद हैं। 

आरोप लगाना सही नहीं
ओवैसी ने अतीक की पत्नी शाइस्ता को अपनी भाभी कहा और पत्रकारों से कहा कि आप पहले मुझसे पूछेंगे कि अतीक के परिवार को शामिल कर रहे हैं जब उसका आपराधिक रिकॉर्ड है।आप पहले मुझसे पूछेंगे कि आप अतीक के परिवार को शामिल कर रहे हैं जब उसका आपराधिक रिकॉर्ड था।तो मैं आपको बता दूं कि भाजपा के कानून निर्माताओं के खिलाफ अधिकतम आपराधिक मामले हैं। एडीआर की रिपोर्ट है।कहते हैं कि भाजपा के एक सांसद पर तो उन पर आतंकी हमले के आरोप भी थे। साध्वी प्रज्ञा का हवाला देते हैं।

बीजेपी के कई नेताओं पर अपराध हैं दर्ज
यहां तक कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी केस चल रहे थे। उनकी पार्टी के कई नेताओं पर मुजफ्फरनगर में उनके खिलाफ दंगों के मामले भी थे। सभी को वापस ले लिया गया।लेकिन अतीक, मुख्तार जैसे नामों वाले ही लोग हैं जिनके खिलाफ मामले लटके रहते हैं। उन्हें कभी वापस नहीं लिया जाता है। शायद अगर उनके पास अन्य नाम होते तो उन्हें वापस ले लिया जाता।आज अतीक अहमद की पत्नी और अतीक अहमद खुद अपनी पत्नी के जरिए एआईएमआईएम की सदस्यता ले रहे हैं।

एसपी, बीएसपी हमें अछूत समझते हैं
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों हमें अछूत समझते थे। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में हम शामिल होंगे और दिखाएंगे कि हम कितना बेहतर चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सपा और बीएसपी को लगता है कि हम किसी के इशारे पर काम करते हैं तो पीछे के इतिहास को देखें तो पता चलेगा कि कौन किसके साथ कब खुले तौर पर रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी है लिहाजा वो किसी के बयान पर रोक कैसे लगा सकते हैं।

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