Fact Check: गृह मंत्रालय ने किया साफ-जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में नहीं बंद हो रही इंटरनेट सेवा

No ban on internet in J&K : गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में इंटरनेट सेवा बंद किए जाने के बारे में किया गया ट्वीट फर्जी है। गृह मंत्री ने इस तरह का कोई भी ट्वीट नहीं किया है।

No fixed line broadband and internet in J&K and Ladakh going to be snapped : Home ministry
जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बंद करने का ट्वीट फर्जी।  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • एक ट्वीट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा होगी बंद
  • पीआईबी के फैक्ट चेक में दावा गलत पाया गया, एमएचए ने दिया बयान
  • गृह मंत्रालय ने कहा है कि गृह मंत्री ने इस तरह का कोई ट्वीट नहीं किया है

नई दिल्ली : गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया में गृह मंत्री अमित शाह के नाम से एक ट्वीट सर्कुलेट हो रहा है जिसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में फिक्सड लाइन ब्राडबैंड एवं इंटरनेट सेवाएं बंद होने जा रही हैं। गृह मंत्रालय ने कहा कि यह ट्वीट फर्जी है। मंत्रालय ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से इस तरह का कोई ट्वीट नहीं किया गया है। बता दें कि हाल के दिनों में ऐसे कई फेक ट्वीट सामने आए हैं जिनका सरकार की तरफ से खंडन किया गया है। इन दिनों 'फेक न्यूज' का चलन भी तेजी से बढ़ा है।

PIB करता है फैक्ट चेक
'फेक न्यूज' के प्रति लोगों को जागरूक करने और असलिय बताने के लिए पीआईबी की तरफ से समय-समय पर फैक्ट चेक किया जाता है। गत 26 जून को पीआईबी ने असम के बागजान स्थित ऑयल इंडिया के तेल कुएं के बारे में दी गई गलत जानकारी का फैक्ट चेक किया। सोशल मीडिया में एक वीडियो सर्कुलेट हुआ जिसमें कहा गया कि बागजान तेल कुएं से ऑयल का रिसाव हो रहा है और यह ऑयल आस पास की नदियों एवं जल स्रोतों में बह रहा है। वहीं, पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में इसे पूरी तरह गलत बताया। पीआईबी ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत है।

ICMR ने किया खंडन
गत 15 जून को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के बारे में एक झूठ फैलाने की कोशिश की गई जिसका कि आईसीएमआर को खंडन करना पड़ा। सोशल मीडिया में उसके एक अध्ययन का हवाला देकर कहा गया कि देश में कोविड-19 का संक्रमण नवंबर महीने में अपने उच्च स्तर पर होगा। आईसीएमआर ने इस ट्वीट का खंडन करते हुए कहा कि उसके अध्ययन का हवाला देकर प्रकाशित मीडिया रिपोर्टें गुमराह करने वाली हैं और इस तरह का अध्ययन उसकी तरफ से नहीं किया गया है। 

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