फांसी के बाद दोषी के शव के साथ क्या करता है जेल प्रशासन, यहां जानिए

निर्भया के दोषियों को फांसी दे दी गई है। आज यानी 20 मार्च को सुबह 5:30 बजे निर्भया के चारों दोषियों को फांसी दी गई। यहां जानें कि आखिर फांसी होने के बाद कैदियों के शवों के साथ क्या किया जाता है।

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निर्भया के दोषियों को फांसी 

नई दिल्ली: निर्भया के दोषियों को आखिरकार फांसी हो गई है। चारों दोषियों मुकेश कुमार सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को फांसी दी गई है। सवाल उठता है कि फांसी दिए जाने के बाद शवों के साथ क्या किया जाता है? क्या जेल प्रशासन ही उनका अंतिम संस्कार करता है या शवों को परिजनों को सौंप दिया जाता है? 

फांसी के बाद दोषियों के शव आधे घंटे तक लटके रहते हैं। यह देखने के लिए कि फांसी के बाद दोषी मृत हैं या नहीं इसके लिए  चिकित्सा परीक्षा होती है। मृत घोषित करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे दिया जाता है। बाद में मृतक कैदियों की उनके धर्म के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाता है।

हालांकि कैदी के परिवार वाले उनके अंतिम संस्कार के लिए लिखित में आवेदन करते हैं, तो सुरक्षा पहलुओं का जायजा लेने के बाद शव उन्हें सौंप दिया जाता है। परिवार वाले लिखित में देते हैं कि शव के अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी तरह का प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। लेकिन ऐसा लगता है कि शव के अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह का प्रदर्शन हो सकता है को शव को परिवार को सौंपने से इनकार किया जा सकता है। 

दोषियों के शव को सम्मान के साथ जेल से निकाला जाता है। शव को अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की जाती है। जेल सुपरिटेंडेंट शव के अंतिम संस्कार करने और शव को अंतिम संस्कार की जगह तक ले जाने के लिए जरूरी खर्च कर सकता है।

फांसी के समय कौन-कौन होगा मौजूद
जेल की नियमावली के अनुसार, फांसी के समय वक्त 5 लोगों की मौजूदगी जरूरी है, इसमें जेल सुपरिटेंडेंट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज, रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर, जिला मजिस्ट्रेट या एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट होते हैं। इसके अलावा दोषी चाहे तो वह उसके धर्म का कोई भी जानकार जैसे पंडित, मौलवी भी मौजूद रह सकता है। जेल के सीनियर अधिकारी के मुताबिक कॉन्स्टेबल 10 से कम नहीं, हेड वार्डर और दो हेड कॉन्स्टेबल, हेड वार्डर या इस संख्या में जेल सशस्त्र गार्ड भी मौजूद होंगे।

फांसी देने वाले दिन सुपरिटेंडेंट, जिला मजिस्ट्रेट/एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट, मेडिकल ऑफिस समेत कई सीनियर अधिकारी सुबह-सुबह कैदी से उसकी कोठरी में मिलने जाते हैं। सुपरिटेंडेंट और जिला मजिस्ट्रेट या एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कैदी की वसीयत समेत किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए जा सकते हैं या उसे अटैच किया जा सकता है। 

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