नवजोत सिंह सिद्धू ने जेल में 24 घंटे में कुछ नहीं खाया, ये है कारण, वकील की अदालत से है ये मांग

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 21, 2022, 07:13 PM IST

Navjot Singh Sidhu in Jail: कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को जेल में करीब 24 घंटे हो गए हैं। उनके वकील एचपीएस वर्मा के अनुसार, सिद्धू ने पटियाला जेल में अभी तक कुछ भी नहीं खाया है।

नवजोत सिंह सिद्धू ने जेल में 24 घंटे में कुछ नहीं खाया, ये है कारण, वकील की अदालत से है ये मांग

Navjot Singh Sidhu: कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को जेल में करीब 24 घंटे हो गए हैं। उनके वकील एचपीएस वर्मा के अनुसार, इस अवधि के दौरान उन्होंने एक भी निवाला नहीं खाया है। वकील ने कहा कि शुक्रवार रात आत्मसमर्पण करने के बाद उन्होंने पटियाला जेल अधिकारियों द्वारा प्रदान किया गया रात का खाना खाने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें गेहूं से एलर्जी है।

वकील एचपीएस वर्मा ने पटियाला कोर्ट में अपील की है कि क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को उनकी सेहत के हिसाब से खाना मुहैया कराया जाए। हालांकि अभी तक अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि मैं सुबह से अदालत में बैठा हूं, जेल अधिकारियों के आने का इंतजार कर रहा हूं। लेकिन अभी तक कोई नहीं आया है।

सिद्धू ने 1988 के रोड रेज मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को एक स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। वहां से उन्हें अनिवार्य चिकित्सकीय जांच के लिए माता कौशल्या अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सा जांच के बाद उन्हें पटियाला केंद्रीय जेल भेज दिया गया। रोड रेज की घटना में 65 वर्षीय बुजुर्ग गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। 

यद्यपि शीर्ष अदालत ने मई 2018 में सिद्धू को जान-बूझकर चोट पहुंचाने के अपराध का दोषी माना था, लेकिन जेल की सजा देने के बजाय केवल एक हजार रुपए का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने गुरनाम सिंह के परिवार की पुनर्विचार याचिका बृहस्पतिवार को स्वीकार कर ली थी और सिद्धू को एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि हमें लगता है कि रिकॉर्ड में एक त्रुटि स्पष्ट है.... इसलिए, हमने सजा के मुद्दे पर पुनर्विचार आवेदन को स्वीकार किया है। लगाए गए जुर्माने के अलावा, हम एक साल के कठोर कारावास की सजा देना उचित समझते हैं।

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