निर्भया के दोषियों की मां, बहन ने कही हैरान करने वाली बातें, कहा- इन्हें एक चांस दिया जाए 

देश
रामानुज सिंह
Updated Feb 14, 2020 | 19:18 IST

Nirbhaya gang rape and murder case : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्भया के दोषी के विनय शर्मा की याचिका खारिज कर दी। लेकिन दोषियों की मां, बहन ने कहा वे निर्दोष हैं।

Nirbhaya gang rape and murder case
निर्भया के दोषियों के रिश्तेदारों ने कहा- ये निर्दोष हैं 

मुख्य बातें

  • प्रमुख आरोपी उसका भाई राम सिंह ने 2013 में तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी।
  • चार दोषी मुकेश कुमार सिंह, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार को फांसी सजा सुनाई गई है
  • दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में 16 दिसंबर, 2012 की रात को फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ गैंगरेप किया गया था, बाद में उसकी मौत हो गई

नई दिल्ली : दिल्ली में 2012 में निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में चार दोषियों के रिश्तेदारों ने गुरुवार को कहा कि वे लोग निर्दोष हैं। दोषी मुकेश की मां ने कहा कि उसे एक चांस दें। उसकी मां ने कहा कि मेरे पास मुकेश के अलावा कोई नहीं है। इस मामले का प्रमुख आरोपी उसका भाई राम सिंह ने 2013 में तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मौत की सजा पाए दोषी विनय कुमार की याचिका खारिज कर दी। विनय कुमार शर्मा ने राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

'एक व्यक्ति की मौत के लिए 5 लोगों को फांसी क्यों'
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक एक अन्य आरोपी पवन गुप्ता की बहन ने भी मांग की कि उसके भाई को फांसी नहीं होनी चाहिए। वह निर्दोष है। तीसरे दोषी विनय शर्मा की मां ने कहा कि एक व्यक्ति की मौत के लिए पांच लोगों को फांसी नहीं दी जा सकती। परिवार के सदस्य दिल्ली की अदालत के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जो 23 साल की पीड़िता के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें चार दोषियों के खिलाफ मौत की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने अपने फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दोषियों के अधिकारों पर जोर देते हुए मामले की सुनवाई 17 फरवरी तक स्थगित कर दी।

मुख्य आरोपी राम सिंह जेल में कर ली थी खुदकुशी
मुख्य आरोपी राम सिंह ने मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के कुछ दिनों बाद तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हमलावरों के सबसे क्रूर कहे जाने वाले किशोर आरोपी को तीन साल के लिए सुधारगृह में रखा गया था। उसे 2015 में रिहा कर दिया गया था और उनके जीवन के खतरे की चिंताओं के बीच उसे एक अज्ञात स्थान पर भेजा गया था। जब वह रिहा हुआ, वह 20 साल का था। मुकेश, विनय, अक्षय और पवन को ट्रायल कोर्ट ने सितंबर 2013 में मौत की सजा सुनाई थी।

निर्भया के माता-पिता कोर्ट के बाहर किया था प्रोटेस्ट 
अदालत के बाहर पीड़िता के माता-पिता ने विरोध किया। निर्भया की मां ने हाल ही में पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर कहा था कि निर्भया को न्याय दो, निर्भया के दोषियों को जल्द से जल्द फांसी दो, अभी नहीं तो कभी नहीं, वी वांट जस्टिस के नारे लगाए। निर्भया के गुनहगार जानबूझकर मामले को लटका रहे हैं। कोर्ट भी सिर्फ उनकी बात ही सुन रही है। क्या कानून सिर्फ दोषियों के पक्ष में है, क्या पीड़ितों का कोई अधिकार नहीं है।

दिल्ली कोर्ट ने 5 फरवरी को सभी कानूनी विकल्पों को समाप्त करने के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया था। वह अवधि 12 फरवरी को समाप्त हो गई और माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी के बाद ट्रायल कोर्ट का रुख किया।

चलती बस में निर्भया के साथ हुआ था गैंगरेप 
दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में 16 दिसंबर, 2012 की रात को फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ गैंगरेप किया गया और उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की गई। सिंगापुर अस्पताल में 15 दिनों बाद उसकी मौत हो गई। छह लोगों में चार दोषियों, राम सिंह और एक किशोर को आरोपी के रूप में नामित किया गया था। पांच वयस्क पुरुषों के खिलाफ मार्च 2013 में एक स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में केस शुरू हुआ।

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