शहादत देने के लिए तैयार थीं ममता बनर्जी, TMC में शामिल होने के बाद फ्लैश बैक में गए यशवंत सिन्हा

देश
ललित राय
Updated Mar 13, 2021 | 15:51 IST

टीएमसी में शामिल यशवंत सिन्हा ने कंधार हाईजैक से जुड़ी यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से यात्रियों की रिहाई के लिए ममता बनर्जी शहादत देने के लिए तैयार थीं।

शहादत देने के लिए तैयार थीं ममता बनर्जी, TMC में शामिल होने के बाद फ्लैश बैक में गए यशवंत सिन्हा
बीजेपी के नेता रहे यशवंत सिन्हा टीएमसी में शामिल 

मुख्य बातें

  • कंधार हाईजैक में यात्रियों की रिहाई के लिए ममता बनर्जी शहादत देने के लिए तैयार थीं ममता बनर्जी- यशवंत सिन्हा
  • यशवंत सिन्हा टीएमसी में शामिल हुए और बीजेपी के बारे में अनुभव को साझा किया
  • 'अटल जी की बीजेपी और मौजूदा बीजपी में जमीन आसमान का अंतर है'

कोलकाता। बीजेपी के नेता रहे यशवंत सिन्हा शनिवार को टीएमसी का हिस्सा बन गए। टीएमसी में शामिल होने के बाद बताया कि किस तरह से अटल जी के समय ही बीजेपी और आज की बीजेपी में बदलाव आया है। उन्होंने कहा पहले बीजेपी सबको एक साथ मिलाकर आगे बढ़ने में भरोसा करती थी। लेकिन आज की बीजेपी दूसरों को कुचल कर आगे की नीति पर चल रही है। इसके साथ ही एनडीए सरकार के दौरान जब कंधार अपहरण कांड हुआ तो ममता बनर्जी ने क्या कुछ कहा था उसे भी बताया।

कंधार केस में ममता शहादत के लिए थीं तैयार
फ्लैश बैक में जाकर यशवंत सिन्हा बताते हैं कि कंधार हाईजैक के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के सामने चुनौती यह थी कि किस तरह से उस मामले से निपटा जाए। कैबिनेट की बैठक में ममता बनर्जी ने कहा कि यात्रियों की रिहाई के लिए वो खुद होस्टेज बनने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि अगर यात्रियों की रिहाई के लिए उनकी जान भी चली जाए तो गम नहीं है।

24 दिसंबर 1999, कंधार कांड
नेपाल की राजधानी काठमांडू से 24 दिसंबर, 1999 को दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 का  हरकत उल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया गया था। अमृतसर, लाहौर और दुबई में लैंडिंग करते हुए आतंकियों ने विमान को कंधार में उतरने के लिए मजबूर किया। 176 यात्रियों में से 27 को दुबई में छोड़ दिया था। लेकिन रूपिन कात्याल नाम के एक यात्री को चाकू से गोदकर मार डाला था। यात्रियों की रिहाई के बदले मसूद अजहर,अहमद उमर सईद शेख और मुस्ताक अहमद जर्गर को  अपहरणकर्ताओं को सौंपना पड़ा था।

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