Maharashtra Politics: क्या महाराष्ट्र में लिखी जा रही है बदलाव की स्क्रिप्ट, सियासी जुबां को समझिए

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 26, 2020, 09:14 PM IST

Rahul Gandhi slams udhav thackeray government: राजनीति में स्थाई भाव होता ही नहीं है। अगर ऐसा होता तो गठबंधन सरकारें आराम से अपने फर्ज को निभातीं। लेकिन राहुल गांधी के बयान के बाद सियासत गरमा गई है।

Maharashtra Politics: क्या महाराष्ट्र में लिखी जा रही है बदलाव की स्क्रिप्ट, सियासी जुबां को समझिए

नई दिल्ली। क्या महाराष्ट्र में बदलाव की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। दरअसल यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कांग्रेस के कद्दावर नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को समर्थन करना और फैसलों में भागीदार होना दोनों अलग अलग विषय है। लेकिन महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोराट ने कहा कि सबकुछ ठीक चल रहा है। तीनों दल मिलजुलकर फैसले करते हैं। इस तरह के राजनीतिक माहौल में महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस का बयान गौर करने लायक है।

सत्ता परिवर्तन का इरादा नहीं
जब फडणवीस से पूछा गया क्या कोरोना काल में सत्ता परिवर्तन देखते हैं तो उनका कहना था कि हम इस संकट की घड़ी में किसी तरह का बदलाव नहीं चाहते हैं। हमारी लड़ाई कोरोना वायरस से है और हम सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि कोरोना के खिलाफ ठोस नीति से निपटने की योजना बने। वो कहते हैं कि इस समय मुद्दा सरकार के बदलने या बचाने का नहीं है, सवाल यह है कि जिस तरह से कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है उसका नतीजा कितना बेहतर हम सबके सामने नजर आ रहा है। 

केंद्रीय मदद का इस्तेमाल नहीं कर पाई उद्धव सरकार
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार की तरफ से जो भी मदद मिली उसे आज तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह वास्तव में समझ के बाहर है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता क्या है। आज राज्य को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जिसका प्रभाव है और उन्हें उम्मीद है कि उद्धव ठाकरे साहसी फैसले करेंगे। दरअसल बीजेपी के कद्दावर नेता नारायण राणे ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार नाकाम रही है और अब राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। इसके साथ ही उनके बेटे नीतेश राणे ने केईएम अस्पताल की तस्वीर जारी की जिसमें कोरोना के शिकार हुए लोगों के शव पड़े हुए थे।

फडणवीस के बयान के दूरगामी मायने
जानकार कहते हैं कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में एक समन्वित प्रयास पर सहमति नहीं बन पा रही है। अगर कांग्रेस के नेताओं को देखें तो वो सत्ता में भागीदार हैं लेकिन कोरोना के विषय पर कम बोलते हैं। इससे भी बड़ी बात है कि कांग्रेस के नेता बीजेपी शासित राज्यों की तरफ इशारा करते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के नाम पर चुप्पी साध लेते हैं जबकि सबसे ज्यादा मामले इसी राज्य से जुड़े हुए हैं। 

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