नई दिल्ली। जब एक साथ थे सुर एक जैसे थे। लेकिन जब दूर हुए तो सूरत और सीरत कुछ बदली सी नजर आने लगी। शिवसेना कभी बीजेपी का साथी हुआ करती थी। बीजेपी और शिवसेना के मुद्दे करीब करीब एक जैसे ही थे खासतौर पर नागरिकता संशोधन बिल, यूनिफॉर्म सिविल कोड पर। अब जबकि नागरिकता संशोधन बिल पारित हो चुका है और उसमें शिवसेना भी भागीदार है। लेकिन शिवसेना के सुर में थोड़ी नरमी आई है।
महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर कोई शख्स बीजेपी के विचारों या सरकार से विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता और उसे देशद्रोही मान लिया जाता है वो बीजेपी का भ्रम है। नागरिकता संशोधन बिल में शिवसेना की तरफ से कुछ बदलाव के संकेत दिए गए। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि यह बिल राज्य सभा में भी पारित होना चाहिए। लेकिन बीजेपी खुद के बनाए मायाजाल में देश को भ्रम में रखना चाहती है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर देश के किसी नागरिक को इस बिल की मंशा पर ऐतराज है तो सरकार को उसे दूर करना चाहिए। जिन लोगों को शंका है उन्हें जवाब देना ही चाहिए। हम इस बिल को राज्यसभा में समर्थन नहीं करेंगे जबतक की लोगों के संदेह को दूर नहीं किया जाता है।
लोकसभा में चर्चा के दौरान शिवसेना का कहना था कि उसे बिल के प्रावधानों से किसी तरह का ऐतराज नहीं है। लेकिन सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जिन शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की जाए उन्हें 25 वर्षों तक वोटिंग राइट न दी जाए, हालांकि शिवसेना ने बिल का समर्थन किया। अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा जहां एनडीए के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। सरकार को बिल पारित कराने के लिए 121 सांसदों का समर्थन चाहिए।
राज्यसभा की मौजूदा तस्वीर
संसद के ऊपरी सदन यानि राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं। लेकिन पांच पद खाली होने की वजह से यह संख्या 240 है। सरकार को बिल पारित करने के 121 सांसदों का समर्थन चाहिए। अगर लोकसभा इस बिल के समर्थन में खड़े होने वाले दलों को देखें तो उनकी संयुक्त संख्या राज्यसभा में 119 होती है। बीजेपी के सर्वाधिक 83 सांसद है, और उन्हें अबतक बीजेडी(7), एआईएडीएमके(11), अकाली दल(3), जेडीयू (6), वाईएसआर कांग्रेस(2), आरपीआई(4) और चार नामित सदस्य हैं। अगर शिवसेना समर्थन देती है तो सरकार के खाते में 122 सांसद होंगे। यह तस्वीर उस वक्त ही है जब राज्यसभा के सभी 240 सांसद वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। अगर कुछ दल बहिष्कार करते हैं या गैरहाजिर होते हैं तो तस्वीर बदल सकती है। अगर लोकसभा में वोटिंग की बात करें तो टीएमसी के कुछ सांसद वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहे।
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