Bihar Vidhansabha chunav 2020: एक खास वोट बैंक पर दोनों गठबंधन की नजर, दिलचस्प होने वाला है चुनाव

Nitish Kumar vs RJD: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों की ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन राजनीति की पिच पर कभी यार्कर तो कभी गूगली फेंकी जा रही है।

Bihar Vidhansabha chunav 2020: एक खास वोट बैंक पर दोनों गठबंधन की नजर, दिलचस्प होने वाला है चुनाव
29 नवंबर को खत्म हो रहा है बिहार विधानसभा का कार्यकाल 

मुख्य बातें

  • बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को हो रहा है समाप्त
  • बिहार में अक्टूबर और नवंबर के बीच चुनाव संभावित
  • बिहार के पूर्व सीएम अब एनडीए के बन चुके हैं हिस्सा

नई दिल्ली।  बिहार की कुल आबादी का करीब 16 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित समाज से जुड़ा हुआ है। इसमें पासवान (लगभग 5़5 प्रतिशत) और रविदास (लगभग 4 प्रतिशत) समुदाय इसके प्रमुख घटक हैं। ये चुनाव में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते रहे हैं।पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने महागठबंधन को छोडकर राजग के प्रमुख घटक दल जनता दल (युनाइटेड) के साथ गठबंधन कर राजग के घटक दलों में शामिल हो गए। मांझी को केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बाद बिहार की राजनीति में दूसरे सबसे महत्वपूर्ण दलित नेता के रूप में देखा जाता है।

दलित समाज को अपने पाले में लाने की कोशिश
फिलहाल सभी दल खासकर राजद और जदयू एससी वोटरों को अपनी तरफ करने की कोशिश में जुटे हैं।उल्लेखनीय है कि राजग के दो घटक दलों -- लोजपा और जदयू के बीच शीत युद्घ जारी है। लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ पिछले दो-तीन महीनों से तीखी नोंक-झोंक चल रही है, जिससे राजग की एकजुटता पर प्रश्न चिह्न खडा हो गया है। इस बीच, जदयू ने एक राजनीतिक चाल चलते हुए मांझी को अपने पक्ष में लाकर ताजा राजनीति में उबाल ला दिया है।

एलजेपी का विज्ञापन क्या जेडीयू पर दबाव की रणनीति
एलजेपी ने सभी दलों पर निशाना साधा है। इसके लिए एक विज्ञापन भी जारी किया गया है,जिसमें बताया गया है कि वो लड़ रहे हैं हम पर राज करने के लिए, हम लड़ रहे हैं बिहार पर नाज करने के लिए।"हालांकि, इस विज्ञापन को जदयू पर दबाव की रणनीति मानी जा रही है, लेकिन विपक्ष अभी से ही राजग पर निशाना साधने लगा है।राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं, राजग में एक 'चिराग' ने ही आग लगा दी है, अब राजग को कोई बचाने वाला नहीं है। इससे पहले ही मांझी भी पहुंच गए हैं जो नैया डूबायेंगे ही।

श्याम रजक ने फिर से थामा आरजेडी हाथ
पूर्व मंत्री श्याम रजक ने जदयू को छोड़कर अपनी पुरानी पार्टी राजद में फिर से शामिल हो गए हैं, जिसे दलित राजनीति के रूप में ही देखा जा रहा है।इधर, जदयू ने एससी समुदाय के ही पूर्व आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार को भी पार्टी में शामिल कर लिया है।जद (यू) के प्रवक्ता और सूचना और जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने कहा, राजग सरकार ने एससी समुदाय के विकास के लिए क्या किया है, यह सभी लोग जानते हैं। प्रत्येक परिवार को आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए एक दर्जन योजनाएं चलाई गई हैं। सरकार ने उनके कल्याण के लिए महादलित विकास मिशन बनाया।"

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