लालू प्रसाद यादव: 29 में सांसद, 42 की उम्र में बने CM, 8 साल पहले आए इस फैसले से लगी चुनाव लड़ने पर रोक

देश
लव रघुवंशी
Updated Jun 11, 2021 | 06:00 IST

Lalu Prasad Yadav birthday: लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प है। बिहार की राजनीति में उनका गहरा असर रहा है। छात्र राजनीति से सफर शुरू करने वाले लालू 29 साल की उम्र में सांसद बने।

Lalu Prasad Yadav
लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन 

मुख्य बातें

  • लालू प्रसाद यादव का जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज में हुआ
  • लालू प्रसाद यादव ने राजनीति की शुरूआत जयप्रकाश नारायण के जेपी आंदोलन से की
  • चारा घोटाल में सजा काट रहे लालू यादव अप्रैल के आखिरी सप्ताह में जमानत पर बाहर आए

Lalu Prasad yadav birthday: आज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन है। 11 जून, 1948 को जन्मे लालू प्रसाद यादव 73 साल के हो गए हैं। चारा घोटाला में सजा काट रहे लालू अभी जमानत पर बाहर हैं। उनका बिहार की राजनीति में कई दशकों से खासा दखल रहा है। हालांकि उन्होंने केंद्र की भी राजनीति की है और वो केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं। 

लालू प्रसाद 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। बाद में वो 2004 से 2009 तक केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री रहे। 2009 में वो बिहार के सारण से सांसद चुने गए। लेकिन 2013 में बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में रांची स्थित सीबीआई की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और 5 साल कारावास की सजा सुनाई। इसके कारण उन्हें लोकसभा की सदस्यता गंवानी पड़ी। चुनाव आयोग के उस समय के नए नियमों के अनुसार लालू यादव 11 साल (5 साल जेल और रिहाई के बाद के 6 साल) तक लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। 

सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला में दोषी सांसदों को संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने से बचाने वाले प्रावधान को भी निरस्त कर दिया था। संसद की सदस्यता गँवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोक सभा के पहले सांसद बन गए।

पत्नी को सौंपी सत्ता

लालू ने पटना विश्वविद्यालय में एक छात्र नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया था। वो 1977 में 29 साल की उम्र में जनता पार्टी के लिए लोकसभा के सबसे कम उम्र के सदस्य के रूप में चुने गए। 1990 में वे 42 साल की आयु बिहार के मुख्यमंत्री बने। वो 1995 में भी भारी बहुमत से विजयी रहे। 1997 में लालू यादव ने जनता दल से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल के नाम से नई पार्टी बना ली। इसी साल सीबीआई ने उनके खिलाफ चारा घोटाला मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा। उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सत्ता सौंपी और खुद आरजेडी के अध्यक्ष बन गए और अपरोक्ष रूप से सत्ता की कमान अपने हाथ में रखी। 

सत्ता से बाहर हुई RJD

नवंबर 2005 के राज्य चुनावों में आरजेडी चुनाव हार गई और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला जदयू और भाजपा का गठबंधन सत्ता में आ गया। 2010 के चुनावों में राजद की और बुरी हार हुई। 2015 के चुनावों में आरजेडी सबसे बड़ा दल बनकर उभरा। आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई। पार्टी की 10 साल बाद सत्ता में वापसी हुई थी, लेकिन 2 साल बाद नीतीश कुमार ने गठबंधन तोड़ दिया और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। पिछले साल हुए राज्य के चुनाव में नीतीश कुमार फिर से बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गई और आरजेडी राज्य में मुख्य विपक्षी दल है।

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