जानिए कौन हैं गुपकार गैंग से बगावत करने वाले सज्जाद लोन, माने जाते हैं पीएम मोदी के खास

देश
किशोर जोशी
Updated Jan 21, 2021 | 14:06 IST

जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने घोषणा की कि उनकी पार्टी सात दलों के ‘गुपकर गठबंधन’ (पीएजीडी) से अलग हो रही है।

Know who is Sajjad Lone, who quits Gupkar Alliance 3 months after its formation
जानिए कौन हैं गुपकार गैंग से बगावत करने वाले सज्जाद लोन 

मुख्य बातें

  • कश्मीर में मोदी के खिलाफ मोर्चे को सज्जाद लोन ने बोला बाय-बाय
  • सज्जाद लोन महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में बनी सरकार में बने थे मंत्री
  • सात दलों के गठबंधन ‘गुपकार गठबंधन’ (पीएजीडी) के प्रवक्ता थे सज्जाद

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में जैसे ही आर्टिकल 370 खत्म हुआ तो वहां के अधिकतर नेताओं को नजरबंद कर लिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया। इसके बाद पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, पीपुल्स कांफ्रेंस सहित सात दलों ने मिलकर एक गठबंधन तैयार किया जिसे ‘गुपकार गठबंधन’ (पीएजीडी) का नाम दिया गया। हाल ही में संपन्न हुए डीडीसी चुनाव में भी इस गठबंधन ने अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन अब इसी 'गैंग' में फासले आने शुरू हो गए हैं और इसकी शुरूआत हुई है जम्मू एंड कश्मीर पीपल्स कांफ्रेंस (JKPC) के मुखिया सज्जाद लोन के इस्तीफे से। लोन ने गुपकार गैंग से अपना नाता तोड़ लिया है।

कौन हैं सज्जाद लोन
सज्जाद लोन के पिता थे अब्दुल गनी लोन जो कभी कांग्रेस के नेता थे लेकिन बाद में अलग होकर उन्होंने जेकेपीसी का गठन कर दिया।इसके बाद बीच में उन्होंने अलगाववाद का रास्ता भी थाम लिया लेकिन बाद में जब हुर्रियत से चुटे तो कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के करीब आ गए और इसका खामियाजा उनको अपनी जान देकर चुकाना पड़ा जब 2002 में उनकी आतंकियों ने हत्या कर दी। इसके बाद सज्जान लोने ने जेकेपीसी की अगुवाई की। इसके बाद वो चुनावी राजनीति में भी आए और 2008 में जब अमरनाथ में हिंसा हुई तो उन्होंने खुद को अलगावाद की विचारधारा से अलग कर लिया। हालांकि उन्होंने 2008 तथा 2009 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा लेकिन 2014 में लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन बारामूला से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर हार गए।

मोदी के करीबी
इसके बाद बीजेपी के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ती गईं और वो इसकी वजह से कश्मीर की स्थानीय पार्टियों ने उन्हें बीजेपी की 'बी' टीम कहना शुरू कर दिया। अलगावादियों ने तो उन्हें गद्दार तक कहा लेकिन 2014 में उनकी पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की और बीजेपी और पीडीपी की गठबंधन वाली सरकार में वो मंत्री बने। लेकिन बाद में विधानसभा भंग हो गई। हाल ही में  डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव में जेकेपीसी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की है। सज्जाद लोन को पीएम मोदी का करीबी भी माना जाता है इसलिए कश्मीर के दौरे के दौरान वह उनके साथ नजर आए।
 

अलग हुई राहें
सज्जाद ने कुछ दिन पहले ही गुपकार से अलग होने का ऐलान कर दिया। वो गुपकार गठबंधन के प्रवक्ता भी थे। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के कुछ घटकों ने जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव में छद्म प्रत्याशी खड़े किए।लोन ने अपने फैसले की घोषणा गुपकर गठबंधन के प्रमुख और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को लिखी चिट्ठी लिखकर कहा,‘यह तथ्य है कि गुपकर गठबंधन ने इस चुनाव में स्पष्ट रूप से सबसे अधिक सीटों पर जीत दर्ज की। हम आंकड़ो को छिपा नहीं सकते हैं और गुपकर गठबंधन द्वारा जीती गईं सीटों के अलावा, एक अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ा पांच अगस्त (अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निष्क्रिय करने) के संदर्भ मतों की संख्या है जो गुपकर गठबंधन के खिलाफ है।’

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