नई दिल्ली। लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद नया नागरिकता संशोधन बिल कानून की शक्ल में हम सबके सामने हैं। ये बात अलग है कि इस कानून के विरोध में असम से लेकर दिल्ली और देशभर के कई राज्यों में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपील करते हुए कहा कि लोकसतंत्र में असहमति हो सकती है। लेकिन जिन तरीकों से विरोध किया जा रहा है वो दुखद है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जो लोग विरोध में हैं उन्हें कानून को पढ़ने और समझने की जरूरत है। लेकिन कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि सरकार एक साजिश के तहत सामाजिक ताने बाने पर चोट पहुंचाने का काम रही है, यही नहीं एनआरसी में जिन लोगों का नाम छूट जाएगा उसे कैब के जरिए नागरिकता दे दी जाएगी।
नागरिकता संशोधन कानून पर डर कितना वास्तविक
अब समझें क्या है एनआरसी
यह है नागरिकता संशोधन कानून
नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने कहा था कि कि मोदी सरकार देश को किस तरफ ले जाना चाहती है। लेकिन गृहमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों को व्यर्थ बहस की आदत पड़ चुकी है उन्हें समझाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक जीते जागते उदाहरण हैं कि उनके साथ क्या हुआ था।
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