जम्‍मू-कश्‍मीर: परिसीमन आयोग ने सौंपी रिपोर्ट, महबूबा बोलीं- हमें नहीं भरोसा

Jammu and Kashmir Delimitation Commission: जम्‍मू-कश्‍मीर परिसीमन आयोग ने राज्य में कुल 7 विधान सभा सीटें बढ़ाने की सिफारिश की है।

PDP Mehbooba  Mufti
महबूबा मुफ्ती ने परिसीमन आयोग की सिफारिशों को नकारा  |  तस्वीर साभार: BCCL
मुख्य बातें
  • आयोग ने कश्मीर क्षेत्र में 46 के बदले 47 सीट करने की सिफारिश की है।
  • इसी तरह जम्मू क्षेत्र में 37 की जगह 43 विधानसभा सीटें होंगी।
  • महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि आयोग भाजपा का एक्सटेंशन है और हमें इस पर भरोसा नहीं है।

Jammu and Kashmir Delimitation Commission:जम्‍मू-कश्‍मीर परिसीमन आयोग ने आज अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। इसके तहत आयोग ने राज्य में कुल 7 विधान सभा सीटें बढ़ाने  की सिफारिश की है। प्रस्ताव के तहत कश्मीर क्षेत्र में 46 के बदले 47 सीट होंगी । और  जम्मू क्षेत्र में 37 की जगह 43 विधानसभा सीटें होंगी। आयोग के प्रस्ताव के बाद राज्य में कुल 90 विधानसभा सीटें होगी। आयोग की रिपोर्ट पर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि आयोग भाजपा का एक्सटेंशन है और हमें इस पर भरोसा नहीं है। इस बीच भारत सरकार ने परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर अधिसूचना जारी कर दी है।

1995 में आखिरी बार हुआ था परिसीमन

जम्मू-कश्मीर में इसके पहले 1995 में परिसीमन किया गया था। करीब 27 साल बाद हुए परिसीमन की प्रक्रिया को पूरा होने में 2 साल का वक्त लगा है। इसके तहत सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से बातचीत की गई है। और करीब 3000 लोगों से परिसीमन के संबंध मे मशविरा भी लिया गाया है। आयोग की अध्यक्षता जस्टिस जस्टिस रंजना देसाई ने की है।

आयोग की सिफारिशों को खारिज करते हुए पर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि आबादी की स्थिति को दरकिनार करते हुए अपने मन के माफिक सीमाओं में बदलाव किया गया है। यह परिसीमन, अनुच्छेद 370 हटाए जाने की बाद की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें कोशिश की गई है कि कैसे जम्मू-कश्मीर के लोगों को कमजोर किया जाए। इसके अलावा कुछ भी नहीं है।

शुरू हो सकती है चुनाव प्रक्रिया

साल 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद लगातार केंद्र सरकार यह संकेत देती रही है, कि राज्य में जल्द चुनाव कराए जाएंगे। परिसीमन आयोग का गठन इसी दिशा में उठाया गया कदम था। अब चूंकि आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके बाद ऐसी उम्मीद है कि राज्य में जल्द चुनाव कराए जा सकते हैं। साल 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया था। और लद्धाख को अलग कर अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है।

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