INS Vikrant: ऐसे बना भारत का पहला स्वेदशी युद्धपोत INS विक्रांत,एयरक्रॉफ्ट लैंडिंग के लिए बनाई गई खास डिजाइन

INS Vikrant: INS विक्रांत की लंबाई 262 मीटर है। और उसका वजन करीब 45,000 टन है। इस युद्धपोत में 88 मेगावाट बिजली की चार गैस टर्बाइनें लगी हैं ।और इसकी अधिकतम गति 28 (नॉट) समुद्री मील है।

INS VIKRANT
आईएनएस विक्रांत रचेगा इतिहास 
मुख्य बातें
  • भारत दुनिया के उन 6 देशों के एलीट ग्रुप में शामिल हो जाएगा, जो कि 40 हजार टन का एयरक्रॉफ्ट करियर बनाने में सक्षम हैं।
  • युद्धपोत 20,000 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
  • कम एरिया में एयरक्रॉफ्ट टेक ऑफ और लैडिंग की क्षमता विकसित की गई।

INS Vikrant:अगले महीने की 2 तारीख को भारतीय नौसेना एक नया इतिहास रचने जा रही है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी INS विक्रांत को भारतीय नौसेना को सौंपेंगे।नया INS विक्रांत भारत में बना पहला स्वदेशी एयर क्राफ्ट कैरियर है। साथ ही भारत दुनिया के उन 6 देशों के एलीट ग्रुप में शामिल हो जाएगा, जो कि 40 हजार टन का एयरक्रॉफ्ट करियर बनाने में सक्षम हैं। आईएनएस विक्रांत में 76 फीसदी कल-पुर्जे स्वदेशी है और यह आत्मनिर्भर भारत के लिए एक नजीर बनेगा।

INS विक्रांत  की क्या है खासियत

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, INS विक्रांत  की लंबाई 262 मीटर है। और उसका वजन करीब 45,000 टन है। इस युद्धपोत में 88 मेगावाट बिजली की चार गैस टर्बाइनें लगी हैं ।और इसकी अधिकतम गति 28 (नॉट) समुद्री मील है। लगभग 20,000 करोड़ की कुल लागत से निर्मित यह युद्धपोत रक्षा मंत्रालय और कोचीन शिपयॉर्ड के बीच अनुबंध के तहत तीन चरणों में पूरी हो हुई है। जो क्रमशः मई 2007, दिसंबर 2014 और अक्टूबर 2019 में पूरी हुई हैं। यह युद्धपोत स्वदेश निर्मित उन्नत किस्म के हल्के हेलीकाप्टर (एएलएच) और हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के अलावा MIG-29 के लड़ाकू जेट, कामोव-31, एमएच-60आर और मल्टी रोल हेलीकाप्टरों के साथ 30 विमानों से युक्त एयर विंग के संचालन में सक्षम है।

कैसे हुई शुरूआत

साल 1999 में करगिल युद्ध के बाद, एक विशाल युद्धपोत की जरूरत को महसूस किया गया। इसके बाद साल 2002 में अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने युद्धपोत के निर्माण की मंजूरी दी। जहाज की कील (निर्माण का कार्य) फरवरी 2009 में रखी गई थी, इसके बाद अगस्त 2013 में इसे लॉन्च किया गया था। युद्धपोत में बड़ी संख्या में स्वदेशी उपकरण और मशीनरी लगी है। इसके निर्माण में बीईएल, भेल, जीआरएसई, केल्ट्रोन, किर्लोस्कर, लार्सन एंड टुब्रो, वार्टसिला इंडिया से साथ-साथ ही 100 से अधिक एमएसएमई शामिल हैं। इसकी प्रमुख उhलब्धि, डीआरडीओ और भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) के बीच साझेदारी के माध्यम से जहाज के लिए स्वदेशी युद्धपोत ग्रेड स्टील का विकास और उत्पादन करना है । युद्धपोत ग्रेड स्टील का विकास भारत को युद्धपोत के संबंध में आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम बनाता है। और उसकी का नतीजा है कि आज देश में बन रहे सभी युद्धपोतों का निर्माण स्वदेशी इस्पात से किया जा रहा है।

कम एरिया में एयरक्रॉफ्ट टेक ऑफ और लैडिंग की क्षमता

INS विक्रांत को कम एरिया में एयरक्रॉफ्ट के टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए खास तौर से डिजाइन किया गया है। इसके लिए एसटीओबीएआर (शॉर्ट टेक-ऑफ बट, आरेस्टेड लैंडिंग) के रूप में डिजाइन किया गया है। जिसमें आगे का हिस्सा ज्यादा उठा हुआ है। इसका फायदा यह है कि एयरक्रॉफ्ट कम जगह में आसानी से टेक ऑफ और लैंग कर लेता है।

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