महंगाई की रैली बनाम बागियों की रैली, क्या आजाद की रैली में कांग्रेस टूट जायेगी?

देश
रंजीता झा
रंजीता झा | SPECIAL CORRESPONDENT
Updated Aug 31, 2022 | 14:28 IST

दिल्ली के रामलीला मैदान में 4 सितंबर को महंगाई के खिलाफ कांग्रेस की हल्ला बोल रैली होने वाली है।

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गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद कई नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी है 
मुख्य बातें
  • दिल्ली के रामलीला मैदान में 4 सितंबर को महंगाई के खिलाफ कांग्रेस की हल्ला बोल रैली
  • आजाद की इस्तीफे के बाद कई नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी है
  • माना ये जा रहा है की गुलाम नबी आजाद आने वाले वक्त में अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी बनायेंगे

नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में 4 सितंबर को महंगाई के खिलाफ कांग्रेस की हल्ला बोल रैली होने वाली है। उम्मीद तो थी कि कांग्रेस के देशभर के नेता एकजुट होकर महंगाई के खिलाफ मोदी सरकार को घेरने का काम करेंगे। लेकिन इस रैली से पहले ही कांग्रेस पार्टी में बिखराव शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

आजाद के बाद कई इस्तीफे
आजाद के इस्तीफे के बाद कई नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी है ,अटकले लगाई जा रही है कि कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा भी आजाद के साथ बागी हो सकता है। इस सबके बीच पार्टी के लिए बुरी खबर ये है कि 4 सितंबर को एक ओर जहां कांग्रेस रामलीला मैदान में हल्ला बोल रैली करने जा रही है वहीं गुलाम नबी आजाद जम्मू के सैनिक फार्म में रैली करने का ऐलान कर दिया है। कश्मीर में आजाद के समर्थन में कांग्रेस के कई बड़े नेता इस्तीफा दे चुके हैं या फिर आने वाले वक्त में देने वाले हैं।

इस्तीफे के बाद बदला समीकरण
गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे और उसके बाद लगातार बदल रहे समीकरण से यह साफ हो गया है की आजाद ने कांग्रेस से आमने सामने की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। 5 पन्नों के इस्तीफे में गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की हर समस्या और पतन के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार बताया है। माना ये जा रहा है की गुलाम नबी आजाद आने वाले वक्त में अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी बनायेंगे। जिसमे G 23 के कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं।

बड़े नेता साइडलाइन
फिलहाल कांग्रेस के कई बड़े नेता आज हासिये पर हैं। जिन्हे राहुल गांधी पसंद नही करते और उन्हे संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे भी कई नेता हैं जो हाल के दिनों में पार्टी छोड़ चुके है। सबसे पहले वो लोग जो पार्टी में होकर भी दरकिनार है वो है आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, पृथ्वीराज चौहान, राजिंदर कौर भट्टल और कपिल सिब्बल जैसे नेता जो हाल ही में पार्टी से बाहर हुए है वो भी आजाद के कुनबे के साथ जुड़ सकते हैं। गुलाम नबी आजाद अगर राजनीतिक दल बनाने है तो उनकी प्राथमिकता जम्मू कश्मीर तो रहेगा ही लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा एक राष्ट्रीय पार्टी बनाकर गैर कांग्रेसी कुनबे को बड़ा करने की होगी।

जम्मू में होने वाली गुलाम नबी आजाद की 4 सितंबर की रैली कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती और खतरे की घंटी बन सकती है। अगर आजाद कांग्रेस के बागी नेताओं को एक मंच पर लाने में कामयाब हो जाते हैं तो ये न केवल राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल लगाएगा, बल्कि शुरू होने से पहले ही कांग्रेस की "भारत जोड़ो यात्रा"को पटरी से उतार देगा।

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