PLA के कब्जे वाले तिब्बत के उपर से गुजरा भारतीय जासूसी सैटेलाइट, हड़बड़ाए चीन ने तैनात किए सैनिक 

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 26, 2020, 07:33 PM IST

Indian spy satellite: भारत का एक जासूस सैटलाइट अभी हाल ही में चीन के कब्जे वाले तिब्बत के ऊपर से गुजरा है बताते हैं कि इस सैटलाइट ने पीएलए के ठिकानों की अच्छी टोह ली है, जिससे चीन हड़बड़ा गया है।

PLA के कब्जे वाले तिब्बत के उपर से गुजरा भारतीय जासूसी सैटेलाइट, हड़बड़ाए चीन ने तैनात किए सैनिक 

नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा संचालित भारत के प्रमुख खुफिया उपग्रह ने चीन के कब्जे वाले तिब्बत के ऊपर से गुजरते हुए चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के ठिकानों की अच्छी टोह ली है। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि उपग्रह कौटिल्य, जो एक एलईएनटी (इलेक्ट्रॉनिक खुफिया) पैकेज वाला है, जिसकी क्षमता सैन्य उद्देश्यों के लिए उच्च-गोपनीय ऑपरेशन और पहलुओं को बारीकी से संरक्षित करने की है, शनिवार को अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी कब्जे वाले तिब्बत में पीएलए के ठिकानों के ऊपर से गुजरा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा निर्मित, यह उपग्रह रेडियो संकेतों की निगरानी करता है जो कि दुश्मन के क्षेत्र में ट्रांसमिशन के सभी स्रोतों की प्रकृति और स्थान का निर्धारण करने के लिए उपयोग किया जाता है। भारत और चीन के बीच लद्दाख में एलएसी पर जारी गतिरोध को लेकर भारत और चीन के बीच बातचीत का कोई परिणाम नहीं निकलने के एक दिन बाद सैटेलाइट तिब्बत के ऊपर से गुजरा है।

सूत्रों ने बताया कि देपसांग सेक्टर में चीनी सैनिक तैनात किए गए हैं, क्योंकि सैनिकों को एलएसी के उनके हिस्से में खुदाई करते हुए देखा जा सकता है। पीएलए ने 2013 में भी देपसांग में घुसपैठ की थी। शुक्रवार को, सूत्रों ने कहा, भारतीय रडार टोही उपग्रह आरआईएसएटी-2बीआरआई जिबूती में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी बेस के ऊपर से गुजरा था। यह अड्डा पीएलएएन का पहला विदेशी सैन्य अड्डा है, जिसे भारी लागत पर बनाया गया है। हाल ही में, खबरें आई थीं कि तीन चीनी युद्धपोत जिबूती तट के पास तैनात हैं।

हालांकि भारत और चीन लद्दाख गतिरोध पर बातचीत में लगे हुए हैं, लद्दाख और कश्मीर में अटकलें हैं कि पाकिस्तान और चीन आने वाली सर्दियों के दौरान भारत के खिलाफ दो-मोर्चे की लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।

चीन के किसी भी आक्रामक बर्ताव का मुंह तोड़ जवाब देने की पूरी आजादी 

चीन के साथ लगती 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात सशस्त्र बलों को चीन के किसी भी आक्रामक बर्ताव का मुंह तोड़ जवाब देने की पूरी आजादी दी गई है हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ लद्दाख में हालात पर उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। रक्षा मंत्री के साथ इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने हिस्सा लिया था।

इस बैठक में सिंह ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जमीनी सीमा, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों में चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए थे सैन्य सूत्रों ने बताया कि गलवान की घटना के बाद भारतीय सैनिक टकराव की हालत में अग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल नहीं करने की लंबी समय से चली आ रही प्रथा को मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे। सूत्रों ने बताया कि सशस्त्र बलों को चीनी सैनिकों के किसी भी दुस्साहस का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है और सीमा की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे है।

गलवान घाटी में हिंसा 45 वर्षों में सीमा पार हिंसा की सबसे बड़ी घटना

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों के शहीद होने के बाद भारत ने चीन से लगती सीमा पर अग्रिम इलाकों में लड़ाकू विमान और हजारों की संख्या में अतिरिक्त सैनिकों को भेजा है। गलवान घाटी में हिंसा 45 वर्षों में सीमा पार हिंसा की सबसे बड़ी घटना है और इससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। हालात के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया है कि भारत शांति चाहता है लेकिन अगर उकसाया गया तो मुंह तोड़ तवाब देने में सक्षम है।
 

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