भारत में 10 फीसदी लोगों के पास देश की 57 फीसदी इनकम, अंग्रेजों के राज से भी ज्यादा असमानता !

World Inequality Report 2022: विश्व असमानता रिपोर्ट ने भारत में असमानता के चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हालात यह है कि इनकम का वितरण अंग्रेजी राज की तुलना में ज्यादा गंभीर हो गया है।

World Inequality Report 2022
भारत में अमीर-गरीब के बीच बढ़ी खाई  |  तस्वीर साभार: ANI
मुख्य बातें
  • अंग्रजों के समय 1857 से 1947 के बीच शीर्ष 10 फीसदी लोगों के पास इनकम की 50 फीसदी के करीब हिस्सेदारी थी।
  • 50 फीसदी की आबादी की इनकम केवल 53,610 रुपये सालाना है।
  • 50 फीसदी आबादी जो कि निचले स्तर पर है, उसकी कुल संपत्ति में केवल 6 फीसदी हिस्सेदारी है।

नई दिल्ली: दुनिया की 6 वीं अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हैं, जहां गंभीर असमानता है। विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 (World Inequality Report 2022) के अनुसार भारत में एक ओर गरीबी बढ़ रही है तो दूसरी ओर एक समृद्ध वर्ग और ऊपर बढ़ता जा रहा है. साल 2021 पर आधारित इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के शीर्ष 10 फीसदी आबादी की इनकम भारत की कुल इनकम का 57 फीसदी है। उसके अनुसार जहां वर्ष 2021 में एक फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय (National Income) का 22 फीसदी हिस्सा है, वहीं कम आय वाले 50 फीसदी आबादी के पास केवल 13 फीसदी है। 

20 गुना अधिक कमाते हैं शीर्ष 10 फीसदी अमीर

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अब दुनिया के उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां गंभीर असमानता है। भारत की वयस्क आबादी की औसत नेशनल इनकम  2,04,200 रुपये है। लेकिन 50 फीसदी की आबादी की इनकम केवल 53,610 रुपये है। वहीं शीर्ष 10 फीसदी आबादी की इनकम इससे करीब 20 गुना (11,66,520 रुपये) अधिक है।

यही नहीं इस 10 फीसदी आबादी के पास कुल नेशनल इनकम का 57 फीसदी हिस्सा है। असमानता का आलम यह है कि  देश की एक फीसदी आबादी के पास कुल नेशनल इनकम का 22 फीसदी हिस्सा है। वहीं, नीचे से 50 फीसदी आबादी की इसमें हिससेदारी मात्र 13 फीसदी है। भारत में औसत घरेलू संपत्ति 9,83,010 रुपये है।

अंग्रेजों के समय 50 फीसदी थी  हिस्सेदारी

सबसे चौंकाने वाली बात इस रिपोर्ट में यह आई है कि अंग्रेजों के शासन के समय (1857-1947) भारत के 10 फीसदी अमीरों के पास देश की कुल आय में 50 फीसदी हिस्सेदारी थी। जबकि ताजा रिपोर्ट में यह हिस्सेदारी 57 फीसदी हो गई है। रिपोर्ट मे कहा गया है कि आजादी के बाद, समाजवाद पर आधारित पंचवर्षीय योजनाओं ने इस असामनता को घटाकर 35-40 फीसदी के स्तर पर ला दिया था। लेकिन 1980 के दशक के मध्य से उदारीकरण के समर्थन वाली नीतियों ने असमानता में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। इस दौरान लोगों की इनकम और संपत्ति में भारीअसमानता देखी गई। इस दौरान सबसे ज्यादा शीर्ष पर मौजूद एक फीसदी आबादी को फायदा हुआ। इस अवधि में मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों को विकास का कम फायदा मिला।

संपत्ति में भी भारी असमानता

आय की तरह देश की संपत्ति में वितरण में भी भारी असमानता दिख रही है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में औसतन एक घर के पास 9,83,010 रुपये की संपत्ति है। जो कि चीन से करीब ढाई गुना कम है। वहीं  अगर संपत्ति के वितरण को देखा जाय तो देश की 50 फीसदी आबादी जो कि निचले स्तर पर है, उसकी कुल संपत्ति में केवल 6 फीसदी हिस्सेदारी है। उसकी औसत आय केवल 66,280 रुपये है। वहीं मध्यम वर्ग को देखे तो वहां भी भारी असमानता है। उसकी औसत आय 723,930 रुपये है और उसकी देश की कुल संपत्ति मं 29.5 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं अगर देश की 10 फीसदी अमीर की संपत्ति देखी जाय तो उसके पास 65 फीसदी संपत्ति है।

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